स्वच्छ भारत’ का कड़वा सच: 6 महीने से सफाई कर्मचारीविहीन दुधवानिया खुर्द गांव, गंदगी के अंबार के बीच जिम्मेदारों पर उठे सवाल

गुरु जी की कलम से

दूध का दूध और पानी का पानी! स्वच्छ भारत अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच विकास खंड बढ़नी का दुधवानिया खुर्द गांव बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। यहां स्वच्छता के तमाम सरकारी दावों की हवा निकलती दिख रही है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि गांव में तैनात सफाई कर्मचारी का करीब छह महीने पहले स्थानांतरण कर दिया गया था, लेकिन तब से लेकर आज तक कोई वैकल्पिक या स्थायी सफाई व्यवस्था नहीं की गई।

परिणामस्वरूप, पूरा गांव कचरे के ढेर और गंदगी के अंबार में तबदील हो चुका है।

1. कर्मचारी हटा, पर क्या गंदगी भी हटी?

ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में सफाई व्यवस्था को लेकर कुछ शिकायतें थीं। लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासनिक अधिकारी समस्या का समाधान कराएंगे और व्यवस्था दुरुस्त होगी। लेकिन अधिकारियों ने समाधान करने के बजाय सफाई कर्मचारी को ही स्थानांतरित कर दिया—मानो “न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी” या “न रहेगा कर्मचारी, न होगी शिकायत!”

पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारी हटाने से क्या गांव की गंदगी अपने आप खत्म हो गई?

2. कागजों में ‘स्वच्छता’, जमीन पर ‘कूड़े का राज’

प्रदेश सरकार गांवों को साफ-सुथरा रखने, बीमारियों से बचाने और स्वच्छ वातावरण देने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है। लेकिन दुधवानिया खुर्द की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिलकुल उलट है।

स्थिति

सरकारी दावे

दुधवानिया खुर्द की हकीकत

तैनाती

हर गांव में नियमित सफाई कर्मचारी

6 महीने से कोई कर्मचारी नहीं

सफाई

रोज कचरा उठाव और नालियों की सफाई

जगह-जगह कूड़े के ढेर और जलभराव

प्रशासनिक निगरानी

नियमित निरीक्षण और त्वरित निस्तारण

शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी

विशेषकर बरसात के मौसम में यह गंदगी और रुका हुआ पानी महामारी तथा गंभीर बीमारियों को दावत दे रहा है।

3. जिला मुख्यालय पर बैठे अफसरों से सीधे 4 सवाल

  1. जवाबदेही किसकी? जब सफाई कर्मचारी को हटाया गया, तो बीते 6 महीनों तक गांव की सफाई व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा था?

  2. फैसले का आधार क्या? सफाई कर्मचारी को हटाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके बाद वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

  3. लापरवाही का जिम्मेदार कौन? क्या कागजों में सफाई दिखाई जा रही है, और यदि नहीं, तो इस अनदेखी का दोषी कौन है?

  4. स्वास्थ्य का जोखिम क्यों? ग्रामीणों को गंदगी और बीमारियों के साए में जीने को मजबूर करने वाले अफसरों पर कार्रवाई कब होगी?

4. “स्वच्छता देखनी है तो दुधवानिया खुर्द आइए”

मामला सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा:

“अगर किसी को ‘स्वच्छ भारत’ अभियान की असली जमीनी हकीकत देखनी है, तो उसे विकास खंड बढ़नी के दुधवानिया खुर्द गांव भेज देना चाहिए। सरकार विज्ञापनों में तो बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर गांवों को महीनों तक लावारिस छोड़ दिया जाता है।”

5. ग्रामीणों की मांग: आश्वासन नहीं, अब कार्रवाई चाहिए!

दुधवानिया खुर्द के ग्रामीणों का कहना है कि वे अब झूठे आश्वासनों से थक चुके हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं:

  • तत्काल स्थायी सफाई कर्मचारी की तैनाती की जाए।

  • गांव में विशेष सफाई अभियान चलाकर जमा कूड़े का निस्तारण हो।

  • लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

गांव साफ होगा या सिर्फ फाइल?

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर धरातल पर कार्रवाई करते हैं या फिर दुधवानिया खुर्द की स्वच्छता को फाइलों के जाल में ही उलझाकर छोड़ दिया जाता है।