सिद्धार्थनगर: बुलडोजर नीति पर भारी पड़ा कब्जा! सोनबरसा में ‘नवीन परती’ पर अवैध निर्माण, बंद हुआ कई घरों का रास्ता

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सिद्धार्थनगर। एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश सरकार पूरे प्रदेश में सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटवाने और अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं सिद्धार्थनगर जिले की इटवा तहसील अंतर्गत ग्राम सोनबरसा से एक विपरीत तस्वीर सामने आई है। यहां सरकारी जमीन पर बेखौफ होकर अवैध निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी वजह से आधा दर्जन से अधिक परिवारों का मुख्य रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। पीड़ित ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

सरकारी अभिलेखों में ‘नवीन परती’, जमीनी हकीकत पर अवैध कब्जा

सोनबरसा गांव के पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, वह सरकारी अभिलेखों में ‘नवीन परती’ के रूप में दर्ज है। इसी जमीन से होकर गांव के कई परिवारों का बरसों पुराना आवागमन का रास्ता था।

पीड़ितों के अनुसार, गांव की ही एक दबंग महिला द्वारा इस सरकारी भूमि पर जबरन अवैध निर्माण कराया जा रहा है। विरोध करने पर भी काम नहीं रोका गया, जिसके चलते कई घरों को जोड़ने वाला रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।

तहसील से लेकर पुलिस तक गुहार, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ‘देख-रेख’

मार्ग बंद होने से परेशान ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से लेकर स्थानीय पुलिस तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन को पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी है, बावजूद इसके कार्रवाई करने के बजाय केवल “देख-रेख” की औपचारिकता निभाई जा रही है।

ग्रामीणों ने व्यथित होकर कहा, “हम प्रशासन के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। रास्ता बंद होने से हम अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं, लेकिन हमारी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है।”

जिम्मेदार नदारद: एसडीएम का फोन भी पाया गया स्विच ऑफ

मामले में शासन-प्रशासन का पक्ष जानने के लिए जब उपजिलाधिकारी (SDM) इटवा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वह अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। इसके बाद जब उनके सीयूजी मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वह भी स्विच ऑफ (Switch Off) पाया गया।

अब देखना यह होगा कि सुशासन का दावा करने वाला जिला प्रशासन इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर अवैध निर्माण ढहाता है और ग्रामीणों का रास्ता बहाल कराता है, या फिर पीड़ित ऐसे ही न्याय के लिए भटकने को मजबूर रहेंगे।