​राष्ट्रगान के दौरान मंच छोड़ गए UP विधानसभा अध्यक्ष? सतीश महाना के वायरल वीडियो पर कांग्रेस हमलावर, सिद्धार्थनगर में जांच की मांग

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर:

उन्नाव के एक सार्वजनिक कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना राष्ट्रगान के दौरान ही कार्यक्रम स्थल से निकलते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। सिद्धार्थनगर में जिला कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग की है।

​जिला कांग्रेस अध्यक्ष क़ाज़ी सुहेल अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने थाना सिद्धार्थनगर के प्रभारी निरीक्षक को ज्ञापन सौंपा।

कांग्रेस की मुख्य मांगें:

  • ​वायरल वीडियो की प्रामाणिकता और सत्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

  • ​कार्यक्रम की मूल सीसीटीवी फुटेज व अन्य संबंधित साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं।

  • ​आयोजन में मौजूद लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर नियमानुसार एफआईआर दर्ज की जाए।

​सिद्धार्थनगर कांग्रेस अध्यक्ष क़ाज़ी सुहेल अहमद ने कहा, “राष्ट्रगान हमारे देश के सम्मान, गौरव और राष्ट्रीय अखंडता का सर्वोपरि प्रतीक है। इतने जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ी ऐसी घटना पर तथ्यात्मक जांच बेहद जरूरी है। यदि जांच में कानून का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर जनआंदोलन करेंगे।”

संपादकीय टिप्पणी (Editorial Comment):

“देशभक्ति की परिभाषा और उसके पैमाने तय करने वाले ठेकेदारों से आज एक सवाल पूछा जाना चाहिए—अगर किसी आम नागरिक से भूल हो जाए, तो उस पर तुरंत ‘देशद्रोही’ का ठप्पा लगा दिया जाता है। लेकिन जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे जिम्मेदार पदों के लोग राष्ट्रगान के बीच उठकर चले जाएं, तब उनके बचाव में दलीलें क्यों तलाशी जाने लगती हैं? क्या राष्ट्रगान के सम्मान में खड़े होने की याद न रहना सिर्फ सत्ताधारियों का अधिकार है? क्या भूल जाना या ध्यान न रहना किसी की भारतीयता को खारिज कर देता है? अगर कोई बुजुर्ग, कम समझ वाला या पढ़ते-पढ़ते भूल जाने वाला आम इंसान ऐसी चूक कर दे, तो क्या वह भारतीय नहीं रहता? देश का राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान हर नागरिक के लिए पूजनीय हैं, और देशभक्ति का पैमाना सबके लिए एक समान होना चाहिए—चाहे वह सडकों पर चलने वाला आम नागरिक हो या विधानसभा की कुर्सी पर बैठा अध्यक्ष!”