चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ व नेपाल से आई पहाड़ी नदियों का कहर: सिद्धार्थनगर में भारी तबाही, 3 दिनों से लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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सिद्धार्थनगर। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव और नेपाल के पहाड़ी इलाकों समेत समूचे तराई क्षेत्र में लगातार तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने सिद्धार्थनगर जिले में तबाही मचा रखी है। बुधवार रात से शुरू हुआ बारिश और चक्रवाती हवाओं का दौर शनिवार को भी लगातार जारी रहा। उफान मारती नदियों, गिरे पेड़ों और टूटे बिजली के खंभों के कारण पूरे जिले में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने लोगों को अति-आवश्यक कार्य न होने पर घरों के भीतर ही रहने की सख्त सलाह दी है।

1. नेपाल से आई पहाड़ी नदियां चरम पर, कटान से नेशनल हाईवे 730 के पुल पर खतरा

तीन दिनों की भीषण बारिश के कारण नेपाल से आने वाली बानगंगा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी, तेलार, जमुआर, चरगहवा और सोतवा नदियां-नाले उफान पर हैं:

  • नेशनल हाईवे पर संकट: शोहरतगढ़ क्षेत्र में बानगंगा नदी बैराज और सड़क पुल के बीच तेज कटान जारी है। कटान की वजह से करीब दो दर्जन सागौन के पेड़ नदी में विलीन हो चुके हैं। बैराज से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित नेशनल हाईवे 730 के बानगंगा नदी पुल के पास तेजी से हो रहे कटान के कारण अब हाईवे के मुख्य पुल पर भी खतरा मंडराने लगा है।

  • लाल निशान पार कर रहीं नदियां: कूड़ा नदी शनिवार सुबह 8 बजे ही लाल निशान को छू चुकी थी। बूढ़ी राप्ती खतरे के निशान से महज 5 सेमी और घोंघी नदी 70 सेमी नीचे बह रही है, जिनके जल्द ही लाल निशान पार करने की आशंका है।

  • प्रशासन अलर्ट: स्थिति का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और एसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने बांसी में राप्ती नदी तथा ककरही में बूढ़ी राप्ती के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण किया और प्रशासनिक टीमों को अलर्ट पर रखा है।

2. जलभराव से संपर्क कटा, जनप्रतिनिधि व अफसर पहुंचे मौके पर

  • नकोलडीह व अन्य मार्ग बंद: बढ़नी ब्लॉक के ग्राम पंचायत खैरी शीतल प्रसाद के टोला नकोलडीह को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन ठप है। खैरा-झुंगहवा सड़क मार्ग और कोटिया दीगर (बेलभरिया) सड़क पर भी बानगंगा नदी का पानी चढ़ गया है।

  • तत्काल राहत की गुहार: ग्रामीणों की स्थिति देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों (अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर, उप जिलाधिकारी शोहरतगढ़ और प्रभारी निरीक्षक ढेबरुआ) से वार्ता कर मौके पर हर संभव मदद पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

3. तूफान से चक्रवाती तबाही: 93 से अधिक पोल धराशायी, 72 घंटे से बिजली ठप

47 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली तूफानी हवाओं ने जिले के बिजली और यातायात ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है:

  • इलाकों में अंधेरा: अकेले इटवा क्षेत्र में 93 से अधिक विद्युत पोल टूटकर गिर गए, जिससे 96 गांवों की बत्ती गुल हो गई। नजरगढ़वा के पास इटवा-बढ़नी 33 केवी लाइन पर भारी पेड़ गिरने से खंभा टूट गया। उस्का बाजार कस्बे और आसपास के इलाकों में पिछले 72 घंटे से बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित है। बांसी और ढेबरुआ उपकेंद्रों के तहत सैकड़ों गांवों में अंधेरा छाया हुआ है।

  • पेयजल व संचार संकट: लगातार बिजली आपूर्ति ठप रहने से लोगों के इनवर्टर जवाब दे चुके हैं, छतों की पानी की टंकियां खाली हो गई हैं और मोबाइल चार्ज न होने से संचार व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।

  • सड़कों पर गिरे पेड़: इटवा-बढ़नी मार्ग, शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग और शोहरतगढ़ क्षेत्र की सड़कों पर भारी भरकम पेड़ उखड़कर गिर गए, जिससे घंटों तक यातायात बाधित रहा। भनवापुर के शाहपुर-सिंगारजोत मार्ग पर एक चलती कार पर पेड़ गिर गया, हालांकि कार सवार सभी लोग बाल-बाल बच गए।

4. मौसम विभाग की चेतावनी और प्रशासन की अपील

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जिले में 29.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है और रविवार तक झमाझम बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने जिले के लिए येलो अलर्ट जारी रखा है।

जिलाधिकारी की अपील: जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने रेड/येलो अलर्ट को ध्यान में रखते हुए सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे जर्जर भवनों, बिजली के पोल, भारी पेड़ों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें तथा आपात स्थिति में ही बाहर निकलें।