जिले में 70 से ज्यादा होटल, पंजीकरण सिर्फ 27 का

Abhishek shukla
सिद्धार्थनगर। शहर समेत जिले के होटलों में ठहरने की सोच रहे हों तो अपनी सुरक्षा का इंतजाम पहले समझ लें, क्योंकि इन होटलों में आपके साथ कोई हादसा हो गया तो किसी भी तरह का कोई दावा आप नहीं कर सकेंगे। जिले में 70 से ज्यादा होटल संचालित हो रहे हैं। इनमें से शहर के 22 और अन्य कस्बों के सिर्फ पांच होटलों ने पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराया है। पर्यटन विभाग के अफसर ऐसे होटल और लॉज को नोटिस जारी करेंगे जो बिना की अनुमति के संचालित हो रहे हैं।
सराय एक्ट में पंजीकरण के लिए होटल, लॉज, गेस्ट हाउस और मैरेज हाल प्रबंधन को खाद्य सुरक्षा, अग्निशमन विभाग पर्यावरण विभाग, बिजली निगम, नगर पालिका से एनओसी और पुलिस अधीक्षक से चरित्र प्रमाणपत्र लेना होता है। इतने विभागों से एनओसी लेने के लिए होटल में सबकुछ नियम कायदे के मुताबिक ही होना चाहिए, लेकिन, इन सबसे बचने के लिए होटल प्रबंधन, सराय एक्ट के तहत पंजीकरण ही नहीं करा रहे हैं। ऐसे होटल संचालकों को पर्यटन विभाग नोटिस भेजने वाला है।शहर के 22 होटल और ग्रामीण क्षेत्रों के पांच के कुछ होटलों को छोड़ दें तो तमाम होटलों और गेस्ट हाउस की व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। ग्राहकों की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोई गारंटी लेने वाला नहीं है। यदि किसी ग्राहक के साथ कोई अनहोनी या गड़बड़ी हो भी जाए तो वह किसी तरह की शिकायत या दावा करने की स्थिति में नहीं होता, जबकि आए दिन इन होटलों में ग्राहकों के साथ किसी न किसी घटना की शिकायतें पुलिस तक पहुंचती ही रहती हैं। यदि पर्यटन विभाग या प्रशासन के अफसरों तक शिकायत पहुंचती भी है तो नियमों के तहत किसी दावे का आधार ही नहीं बनता, क्योंकि होटल गेस्ट हाउस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं होता सिर्फ नाम पर यह सब चल रहा है, रिकॉर्ड में कुछ भी नहीं है। ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता रह जाता है और वह है पुलिस, ग्राहक पुलिस को यदि राजी कर भी लेते हैं तो होटल वाले वहां भी निपट ही लेते हैं। यदि पुलिस से बात सही नहीं हो तभी उम्मीद बन पाती है कि ग्राहक की कोई सुन ले।
अंग्रेजों के जमाने के नियमों की आड़ में मनमानी

ब्रिटिश काल में वर्ष 1867 में सराय एक्ट बनाया गया था। अंग्रेजों के जमाने के इस एक्ट में आज भी होटलों का पंजीकरण किया जा रहा है। एक्ट में सराय से आशय ऐसे भवन से माना गया था, जिसे यात्रियों के आश्रय और आवास के लिए प्रयोग में लाया जाता हो। एक्ट में प्रावधान है कि डीएम कार्यालय में एक रजिस्टर रखा रहेगा, इसमें वह स्वयं या उसके द्वारा नामित व्यक्ति अपने अधिकार क्षेत्र के अंदर आने वाली सभी सरायों, सरायपालों के नाम, निवास स्थान की प्रविष्टि करेगा, लेकिन इन नियमों से कोई डरता नहीं है, इसलिए मनमानी जोरों पर है।नगर पालिका के मैरेज हाल भी पंजीकृत नहीं
नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर की ओर से शहर में बनाए गए तीन मैरेज हाल का पंजीकरण भी पर्यटन विभाग में नहीं है। यदि पंजीयन कराया जाता है तो मानकों की जांच होती है और सुरक्षा की सुविधाएं बढ़ जाती है। नगर पालिका परिषद के ईओ मुकेश चौधरी ने बताया कि नगर पालिका के मैरेज हाल का पंजीयन कराया जाएगा।खंडहर हो गया इकलौता होटल
पर्यटन विभाग ने वर्ष 1998 में कपिलवस्तु में होटल शाक्य बनाया था। वर्ष 2015 से ही इस होटल को संचालन नहीं हो रहा है, इस कारण चमचमाता हुआ होटल खंडहर में तब्दील हो गया है। पर्यटन विभाग ने इसे पीपीपी मोड शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह प्रयास सार्थक नहीं हुआ।
—-
अच्छे हाटलों के लिए करिए इंतजार
शहर में पर्याप्त संख्या में अच्छे होटलों के लिए लोगों को इंतजार करना होगा। जिले में हर माह एक हजार से अधिक देसी और करीब 50 विदेशी पर्यटक आते हैं, लेकिन कपिलवस्तु में ही पर्यटन सुविधाओं का अभाव है। जिले में हुए इन्वेस्टर्स समिट में स्थानीय एवं बाहरी उद्यमियों ने होटल के 25 प्रोजेक्ट का एमओयू किया है, लेकिन ये प्रोजेक्ट धरातल पर कब उतरेंगे, इसका कोई ठिकाना नहीं है। लोहिया कला भवन में भारतीय स्टेट बैंक की ओर से बीते 15 जून को आयोजित लोन मेला में निवेशकों को आमंत्रित किया गया था, जिसमें इन्वेस्टर्स समिट के सभी उद्यमियों को सूचना दी गई थी, लेकिन उसमें होटल के एक भी निवेशक नहीं आए। उपायुक्त उद्योग दयाशंकर सरोज ने बताया कि जिन निवेशकों ने एमओयू किया है, उनसे निरंतर संवाद हो रहा है। अधिक संख्या में प्रोजेक्ट शुरू कराने की कोशिश की जा रही है।
होटल संचालकों को सराय एक्ट में पंजीकरण कराना जरूरी है। नियम की सख्ती से पालन कराया जाएगा। जिनका पंजीकरण नहीं हुआ है, उनको नोटिस जारी कर जल्दी से पंजीकरण कराया जाएगा।
– राजेंद्र प्रसाद, उपनिदेशक, पर्यटन।