सिद्धार्थ नगर – राप्ती नदी के कटान से ग्रामीण परेशान , अपने गाँव के भविष्य को लेकर चिंता में दिखी महिलाएं , खानापूर्ति मे वर्षो से प्रशासन

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सिद्धार्थनगर मे दो बड़ी नदिया राप्ती बूढी राप्ती प्रत्येक वर्ष नदी के किनारे बसे गांव के घरो को अपने आगोश मे लेती वर्षो से चली आ रही है। जिसका कोई ठोस कदम जिला प्रशासन एवं प्रदेश सरकार नहीं उठाती है जिसका खामियाजा ग्रामीणों को हर साल नदी के उफान के बाद घटतें पानी के दौरान झेलना पड़ता है और लोग अपना घर नदी विलीन होते देखते रह जाते है।

हम बात करें तो राप्ती नदी से सटे गांव रीवानानकर की जहाँ पर राप्ती नदी तेजी से कटान कर रही लेकिन जिला प्रशासन इसे वर्षो से नजर अंदाज करता आया और आज भी कर रहा जिससे ग्रामीणों मे भय बना रहा रहता है और नदी कटान ग्राम वासी अपने मकान नदी मे खो देते हैं । और इन परिवारों को खुले आसमान के नीचे आ जाना पड़ता है।

इसको लेकर आपदा युवा स्वयं सेवक दल इनके मुद्दे को लेकर शासन प्रशासन से पैरवी करता आ रहा है। लेकिन अबतक कोई सार्थक परिणाम नहीं आ सका |

रीवानानकर निवासी जानकी जो महिला मजदूर संघ की अध्यक्ष है दर्जनों महिलाओ के साथ पहुंच कर तहसील प्रशासन को आगाह कराया उपजिलाधिकारी ने अस्वासन देते हुए गांव के बचाव हेतु पत्थर पीचिंग कराने की बात कही जिससे ग्रामीणों मे संतुष्टि आई लेकिन ज़ब नदी का कटान रोकने को लेकर नदियों तिगोड़िया और मिट्टी से भरे बोरी से नदी कटान रोकने ठीकेदार पहुँचे तो ग्रामीणों ने इसका विरोध किया |

और तबतक काम नहीं होने की बात कही जबतक पत्थर पीचिंग नहीं होती चूकि यह प्रक्रिया वर्षो से नदी कटान रोकने के लिए होता रहा और नदी काटती रही लोगो के घर नदी मे विलीन होते रहे ऐसे मे इस कार्य से ग्रामीणों मे रोष व्याप्त है और तहसील प्रशासन का घेराव करने का मन बना लिया है।

इस संबंध मे ग्राम प्रधान सुभाष यादव ने कहाँ स्थानीय प्रतिनिधि सांसद विधायक को भी इस बारे में जानकारी दी जाती है लेकिन उनकी भी नजर रीवानानकर गांव को नदी कटान से बचाने के उपर नहीं जाती है ऐसे इनके प्रति भी ग्रामीणों का रोष है।

मात्र चुनाव मे जुमले फेकते है गांव को बचाने के लिए पत्थर लगवाने की बात करते जो चुनाव खत्म होने के बाद भूल जाता है। नदी के कटान से ग्रामीण परेशान है।