माता – पिता से 70 गुना अधिक प्रेम करता है अल्लाह अपने बन्दों से – अहमद हुसैन फैजी

– जिसकी अंतिम मंजिल कब्र सही उसका पूरा सफऱ अच्छा होगा – मौलाना आखिर मक्की

– एक दूसरे से ईर्ष्या कदापि न करें , संबधो को जोड़े तोड़े नही – मोहम्मद अहमद
——————-

जाकिर खान

सिद्धार्थनगर । संसार को चलाने और बनाने वाला ईश्वर अल्लाह अपने प्यारे बन्दो को उन्के माता – पिता से 70 गुना अधिक प्रेम करता है । इसलिए हमे अपने मालिक की इबादत अवश्य करना चाहिए । प्रकृति ने अपने बन्दो को सिर्फ और सिर्फ अपनी इबादत ही के लिए पृथ्वी पर जन्म दिया है । दुनिया एक परीक्षा हाल और आजमाईश की जगह है । हर मानव एक मुशाफिर की तरह है ।

सभी के मेहनत और कार्यों का जायजा मैदान – ए – मैशर मे होना निश्चित है । आप का सफऱ लम्बा है और सामान कम है । जिसकी जो करनी होगी सबके सामने होगा । कोई भी कर्म ढकी छिपी नही होगी । ईश्वर से प्रेम करो वो तुम्हे बहुत ज्यादा मुहब्बत करता है ।

उक्त बातें रविवार की रात्रि को कोतवाली लोटन बाजार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मस्जिदिया मे मोहम्मद मुस्तकीम खान उर्फ़ दुख्खी बाबू द्वारा आयोजित एक दिवसीय दीनी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ मुस्लिम विद्वान व मौलाना अहमद हुसैन फैंजी ने लोगों को खेताब करते हुए कहा ।

उन्होने आगे कहा कि हम सभी लोगों का सफर बहुत लम्बा है । रास्ते का सामान बहुत कम है । अल्लाह को अपने बंदो से कुछ और नही चाहता है सिवाय अपने इबादत के । पुरी दुनिया के मालिक् यह देखना चाहता है कि कौन बंदा है जो सबसे अच्छे कर्म करके दुबारा मेरे पास वापस आये । जिसे मै उस बन्दे को पुरुष्कार स्वरूप जन्नतुल फिरदोस भेंट करूँ । दुनिया चंद दिनों की है ।

हम सभी की जीवन लीला अपने निश्चित समय पर ख़त्म हो जाएगी । हमे कर्मो का मूल्याकन करते रहना चाहिए । जिससे
जीवन को बेहतर बनाया जा सके । एक न एक दिन आएगा जब जमीन पर सभी जीव जंतुओं को मौत के घाट से उतरना पड़ेगा । पुरी दुनिया फना व विनाश हो जाएगी । शेष बचेगी प्रकृति कि जात ।

इसी क्रम मे वरिष्ठ मुस्लिम आलिम व विद्वान मौलाना अब्दुल आखिर मक्की ने भी दीनी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि व्यक्ति के मौत के बाद पहली मंजिल कब्र सही । उसका पूरा सफऱ अच्छा होगा ।

अल्लाह की जात हर एब से पाक है । वही है जो इबादत के लायक है । हर मुस्लिम को चाहिए की वो एक ईश्वर की ही इबाद्त करें । आसमानी पवित्र किताब को नित्य पढना चाहिए । अनेक ईश्वर का कोई हकीकत नही है। अनेक ईश्वर को मानने वाला हकीकत मे मुस्लिम हो ही नही सकता ।

अल्लाह् अपने पवित्र किताब् को नाजिल एवं औतरित किया है । वही इसकी हिफाजत व सुरक्षा अपने कब्जे मे रखा है । जिसकी अंतिम मंजिल कब्र सही उसका पूरा सफऱ अच्छा होगा । हमे अपने जुबान पर विराम और सयंम रखना चाहिए । जुबान के गलत प्रयोग से समाज मे अफरा तफरी उत्पन्न हो जाती है । इस पे काबू रखे ।

इसी क्रम मे युवा मुस्लिम आलिम मौलाना मोहम्मद अहमद फैजी ने दीनी कार्यक्रम को खेताब करते हुए कहा इंसान सबसे सर्व श्रेष्ठ प्राणी के रूप मे जमीन पर पैदा किया गया है । मानव को ईश्वर ने ज्ञान से परिपूर्ण किया है । समाज मे जब जब बेहयाई और नग्नता आएगी ।समाज मे उथल पुथल शुरु हो जायेगा । मानव तब दानव बन जाता है । लोग परेशान हो जाते हैं । दुखों का अम्बार् लग जायेगा । उसे पता भी नही चलेगा ।

एक ईश्वर की इबादत करें । बन्दों की हकों को पुरा करो । किसी का हक मत गबन करे । वरना स्वयं का गबन निश्चित है ।
कार्यक्रम को मौलाना निजामुद्दीन सल्फी ने भी खेताब किया । उनहोंने कहा की मानव के जन्म के बाद 3 पन आता है । वो पहला पन बचपना दूसरा जवानी और तीसरा बुढ़ापा । बस इसी तीन पनो मे उसकी जीवन लीला ख़त्म हो जाती है । जो सतर्क रहा वो अपने लक्ष्य को पा जाता है । और जो लापरवाह होता हैं वो भटक जाता है ।

दीनी कार्यक्रम की शुरुआत हाफ़िज व कारी सैदुररहमान ने कलाम -ए- पाक की तिलावत से की । कार्यक्रम मे मौलाना शोहराब अली ने नज्म पढ़ कर लोगों मे जागृति पैदा किया ।
कार्यक्रम का संचालन व निजामत मौलाना सेराज आलम ने की ।

कार्यक्रम के आयोजक मोहम्मद मुस्तकीम उर्फ़ दुख्खी बाबू ने सभी का आभार व्यक्त किया । अंतिम मे सम्पूर्ण समाज् एवं मुल्क मे अमन और सौहार्द के लिए फैजी साहब ने दुआए खैर मांग कर कार्यक्रम को समाप्त हुआ ।

इस मौके पर मौलाना जलालुद्दीन रियाजी , पत्रकार जाकिर खान , मोहम्मद फारूक , वाजिद अली उर्फ़ भुनेसर खान , जुमराती खान , मुनीर खान ,डाक्टर जमिरुल्लाह सिद्दीकी , बरसाती खान , जमाल अहमद खान , इक़बाल खान ,मन्नान खान , अख़लाक़ खान , अब्दुल्लाह , राशिद खान , यूनुस , सहबाज अहमद , मुस्तकीम अंसारी सहित आदि लोग मौजूद रहे ।