📅 Published on: March 7, 2024
इन्सान की पहली चाहत है एक स्वस्थ और सुंदर शरीर पर कभी कभी एक छोटी सी चीज भी आपके सारे स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है जी हां और यह छोटी चीज है थायराइड हार्मोन डॉक्टर ऑफ़ द मंथ में महिलाओं में थायराइड से होने वाली बीमारी और गर्भ धारण में उसके दुष्प्रभाव पर चर्चा में वरिष्ट महिला डॉक्टर संगीता पाण्डेय डॉ संगीता पाण्डेय M. B. B. S. , D. G. O. स्त्री रोग विशेषग्य के साथ |
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Q – डॉक्टर साहब सबसे पहले यह बताएं कि थायराइड होता क्या है ?
थायराइड एक तितली के आकार की ग्रंथि है जो गले के सामने, श्वासनली के ऊपर स्थित होती है। यह एंडोक्राइन ग्रंथियों का एक हिस्सा है, जो शरीर में हार्मोन का उत्पादन और स्राव करती हैं। थायराइड ग्रंथि मुख्य रूप से दो प्रकार के हार्मोन का उत्पादन करती है: थायरोक्सिन (T4): और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3): शरीर के चयापचय को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन T4 की तुलना में यह अधिक सक्रिय होता है।
थायराइड हार्मोन शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा जरूरी काम है वह है एक महिला का गर्भधारण करना और गर्भ में पल रहे बच्चे का मस्तिष्क का विकास |
एक सामान्य व्यक्ति या महिला को कब और कैसे पता हो कि वह थायराइड से पीड़ित है ?
कुछ लक्षण है जिनसे आप जान सकते है जिअसे जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन नहीं करती है, तो इसे हाइपोथायरायडिज्म कहा जाता है। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में थकान, वजन बढ़ना, ठंड लगना, कब्ज, सूखी त्वचा और बालों का झड़ना शामिल हैं।
जब थायराइड ग्रंथि बहुत अधिक हार्मोन का उत्पादन करती है, तो इसे हाइपरथायरायडिज्म कहा जाता है। हाइपरथायरायडिज्म के लक्षणों में चिंता, अनिद्रा, वजन कम होना, गर्मी लगना, दस्त, और घबराहट शामिल हैं।
रक्त परीक्षण और अन्य परीक्षणों द्वारा आसानी से थायराइड के स्तर को जाना जा सकता है। उपचार में आमतौर पर दवाएं शामिल होती हैं जो थायराइड हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करती हैं।
थायराइड रोग होने के कौन से कारण हैं ?
थायराइड रोग कई कारणों से हो सकता है, जिनमें शामिल हैं:
आयोडीन की कमी: आयोडीन एक खनिज है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन के लिए आवश्यक है। यदि आपके आहार में पर्याप्त आयोडीन नहीं है, तो आपको थायराइड रोग का खतरा बढ़ सकता है।
ऑटोइम्यून रोग: ऑटोइम्यून रोग एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ ऊतकों पर हमला करती है।
थायराइड ग्रंथि की सूजन: थायराइड ग्रंथि की सूजन, जिसे गॉइटर भी कहा जाता है, थायराइड रोग का कारण बन सकता है। गॉइटर कई कारणों से हो सकता है, जिसमें आयोडीन की कमी, ऑटोइम्यून रोग, और थायराइड ग्रंथि में गांठ शामिल हैं।
थायराइड ग्रंथि में गांठ: थायराइड ग्रंथि में गांठ सौम्य या कैंसरयुक्त हो सकती है। सौम्य गांठ आमतौर पर थायराइड रोग का कारण नहीं बनती हैं, लेकिन कैंसरयुक्त गांठ हाइपरथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म का कारण बन सकती हैं।
दवाओं के दुष्प्रभाव से भी थायराइड के स्तर में उतर चढाव हो सकता है |
आनुवंशिकी: कुछ लोगों में थायराइड रोग का पारिवारिक इतिहास होता है। यदि आपके परिवार में किसी को थायराइड रोग है, तो आपको इसका खतरा बढ़ सकता है।
तनाव: तनाव थायराइड रोग के लक्षणों को खराब कर सकता है |
Q – महिलाओं में थायराइड बढ़ने से उनके गर्भ धारण पर क्या प्रभाव पड़ते हैं ?
देखिये महिलाओं में थायराइड बढ़ने से कई तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
बांझपन: थायराइड हार्मोन प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि थायराइड हार्मोन का स्तर बहुत अधिक या बहुत कम है, तो यह महिलाओं को गर्भवती होने में मुश्किल पैदा कर सकता है।
गर्भपात: थायराइड रोग गर्भपात के खतरे को बढ़ा सकता है।
जन्मजात विकार: यदि गर्भवती महिला को हाइपोथायरायडिज्म है, तो उसके बच्चे में जन्मजात विकारों का खतरा बढ़ सकता है, जैसे कि क्रेडिटिनिज्म, जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।
समय से पहले जन्म: थायराइड रोग समय से पहले जन्म का कारण बन सकता है।
कम जन्म वजन: थायराइड रोग वाले बच्चों का जन्म कम वजन के साथ हो सकता है।
गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं: थायराइड रोग गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ा सकता है, जैसे कि उच्च रक्तचाप, प्रीक्लेम्पसिया, और गर्भकालीन मधुमेह।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि थायराइड रोग से पीड़ित सभी महिलाओं को गर्भ धारण करने या गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का अनुभव नहीं होगा। यदि आपको थायराइड रोग है और आप गर्भवती होने की योजना बना रही हैं, तो डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है। वे आपके थायराइड हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं और गर्भावस्था के दौरान आपके स्वास्थ्य की निगरानी कर सकते हैं।
थायराइड रोगों के जोखिम को कम करने के लिए उपाय या बचाव
स्वस्थ आहार खाएं: एक स्वस्थ आहार जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दुबला प्रोटीन शामिल हों, थायराइड रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
नियमित व्यायाम करें: नियमित व्यायाम थायराइड रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
तनाव कम करें: तनाव थायराइड रोगों के लक्षणों को खराब कर सकता है। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान, या अन्य विश्राम तकनीकों का अभ्यास करें।
यदि आपको थायराइड रोग के लक्षण हैं, तो डॉक्टर से मिलना महत्वपूर्ण है।
रोग के लक्षण
थायराइड रोग के लक्षण कई प्रकार के होते हैं, जो थायराइड ग्रंथि के हार्मोन उत्पादन स्तर पर निर्भर करते हैं।
हाइपोथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की कमी) के लक्षण:
थकान वजन बढ़ना ठंड लगना कब्ज सूखी त्वचा और बालों का झड़ना धीमी गति से बोलना और सोचना अवसाद मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी अनियमित मासिक धर्म बांझपन
हाइपरथायरायडिज्म (थायराइड हार्मोन की अधिकता) के लक्षण:
चिंता अनिद्रा वजन कम होना गर्मी लगना दस्त घबराहट तेज़ दिल की धड़कन
थकान मांसपेशियों में कमजोरी पतले और भंगुर बाल आंखों की समस्याएं
गले में सूजन गले में गांठ सांस लेने में तकलीफ निगलने में तकलीफ खांसी
आवाज में बदलाव देखने को मिल सकते हैं | यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से मिले |
थायराइड रोग का निदान रक्त परीक्षण और अन्य परीक्षणों द्वारा किया जाता है। उपचार में आमतौर पर दवाएं शामिल होती हैं जो थायराइड हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करती हैं।
थायराइड बीमारी पर पर्यावरण या भू भाग सॉइल का कितना असर होता ?
देखिये एक समय ऐसा भी था जब हम आयोडीन के बारे में नहीं जानते थे, पर्यावरण और भूभाग मिट्टी का थायराइड रोगों पर पहले कुछ हद तक प्रभाव पड़ता था जैसे हिमालय की तराई में बसने वाले लोगों में मुख्य रूप से आयोडीन की कमी के कारण पाए जाते थे |
आयोडीन की कमी: आयोडीन एक खनिज है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन के लिए आवश्यक है। यदि मिट्टी में आयोडीन की कमी है, तो उस क्षेत्र में उगाए गए भोजन में भी आयोडीन की कमी होगी। इससे हाइपोथायरायडिज्म का खतरा बढ़ सकता है पर अब ऐसा नहीं है आम जनता आयोडीन को लेकर काफी हद तक जागरूक हो चुकी है अब उनके खाने में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन होता है |