📅 Published on: April 10, 2024
अब नहीं चलने पायेगी प्राइवेट अस्पतालों की कलाकारी ,हॉस्पिटल के फ्रंट पर बोर्ड पर देना होगा एक एक कर्मचारी का पूरा विवरण यही नहीं बोर्ड में जिस डॉक्टर .नर्स और फार्मासिस्ट का नाम लिखा रहेगा अस्पताल के अन्दर मरीज को वही डॉक्टर मिलना भी चाहिए
* एक चिकित्सक के नाम पर अब पंजीकृत होंगे केवल दो प्राइवेट चिकित्सालय
* शासन के नये निर्देश से निजी चिकित्सालयों के संचालकों की बढ़ी समस्याएं
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शासन के नये निर्देश से प्राइवेट चिकित्सालयों के संचालकों की मुसीबतें बढ़ गयी है एवं इससे उनकी दादागिरी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। एक चिकित्सक के नाम पर अब केवल दो प्राइवेट अस्पताल पंजीकृत हो पायेंगे। जिस चिकित्सक का अभिलेख पंजीकरण के लिए जमा होंगे, उन्हें बारी बारी दोनों अस्पतालों पर अपनी सेवाएं देनी होगी। इसके अलावा चिकित्सालय के मुख्य द्वार पर – एक बोर्ड भी लगाना होगा। जिसमें तमाम जानकारियों का उल्लेख करना होगा।
मालूम हो कि पहले एक चिकित्सक के नाम पर अनेक अस्पतालों का संचालन होता था। जिस चिकित्सक का नाम दिया जाता था, उनमें तमाम अस्पताल ऐसे भी थे, जिन पर चिकित्सक का कभी जाते नहीं थे। शहर के बड़े-बड़े चिकित्सकों का नाम बोर्ड पर अंकित कराकर निजी चिकित्सालयों के संचालक मरीजों को गुमराह करते थे।
बड़े नाम देखकर मरीज अस्पताल में जाता था, मगर बड़े चिकित्सकों का दर्शन उसे नहीं होता था। निजी अस्पताल संचालक बड़े-बड़े चिकित्सकों के नाम पर मरीजों से धनादोहन भी कर लेते थे।
बताया जाता है कि ऐसी शिकायतों से जब शासन अवगत हुआ तो उसने इस गैरकानूनी धंधे पर नकेल कसने की तैयारी शुरू की। उसने प्राइवेट अस्पताल संचालकों के लिए एक नया शासनादेश जारी किया।
नये शासनादेश के मुताबिक अब अस्पताल के मुख्य द्वार जो बोर्ड पर लगेगा, उस पर अस्पताल का नाम, पता, मलिक का नाम व पता, पंजीकरण तिथि एवं वैधता, इंचार्ज का नाम व मोबाइल नम्बर, बेडों की संख्या, चिकित्सा पद्धति, चिकित्सकों के नाम, एमसीआई डीसीआई पंजीकरण नम्बर और एचपीआर नम्बर समेत अन्य कई सूचनाओं की जानकारी बोर्ड पर देनी जरूरी होगी।
इस सिलसिले में प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों के नोडल अफसर डा. संजय गुप्ता ने बताया कि शासन ने जो नया निर्देश जारी किया, उसे जिले के सभी संचालित अस्पतालों के संचालकों भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि अब जिले में प्राइवेट अस्पतालों का संचालन तभी हो पायेगा, जब नये फरमान को पूरा किया जायेगा।