उर्स ए कलंदरी में दूर दूर से पहुचें उलमा अपने अपने खताबात से जनता का मन मोह लिया

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सिद्धार्थनगर के तहसील इटवा के डोकम अम्या गांव में मशहूद रजा की याद में हर साल की तरह इस साल भी उर्स कलंदरी का आयोजन डोकम अम्या में किया गया। यह उर्स पिछले नौ सालों से लगातार मनाया जा रहा है ।यह उर्स आज मंगलवार को मनाया गया।हजरत मौलाना तहारत साहब ने मीडिया को बताया कि यह कर्यक्रम आपसी भाईचारे का पैगाम देता।वर्षो से यहा सुफी संतो ने अमन सान्ती का पैगाम दिया।यहां दूर दूर से उलमा तसरीफ लाते हैं ।वही हजरत हाफिज कारी निदाये इस्लाम ने कहा माशहूद रजा की जिंदा करामत यह मानी जाती है कि उनके इंतेकाल के बाद पहले इन्हें पीलीभीत में दफन किया गया था लेकिन बाद में उनकी लाश को निकाल कर डोकम अम्या में लाकर दोबारा दफन किया गया।महीनो बाद लाश निकालने के बाद भी कफन पर दाग भी नही लगा था न ही लाश खराब हुई थी।जिसे हम लोग उनका उर्स मनाते हैं। क्षेत्र के लोग काफी अकीदत के साथ मजार पर हाजिरी देते हैं।और उनकी मुरादे पूरी होती है।उपस्थित उलमाओं ने अपने कलाम से जनता का मन मोह लिया।नातेकलाम हम्दो सना पैस किया।

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