📅 Published on: March 25, 2025
गुरु जी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर: नगर पंचायत बढ़नी बाजार के वार्ड नंबर 2 मिल कॉलोनी में लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर महज एक शोपीस बनकर रह गया है। करीब 32 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी यह केंद्र अपने उद्देश्य में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
हालात यह हैं कि यहाँ न तो कोई कर्मचारी तैनात है और न ही कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की कोई प्रक्रिया अपनाई जाती है।
जब इस सेंटर का निर्माण किया गया था, तब नगर पंचायत के जिम्मेदारों ने बड़े-बड़े दावे किए थे। कहा गया था कि यहाँ कूड़े से खाद बनाई जाएगी और प्लास्टिक व अन्य रिसाइक्लेबल कचरे को अलग कर पर्यावरण हितैषी तरीके से निस्तारित किया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि यह केंद्र कभी चालू ही नहीं हुआ। नगर प्रशासन ने लाखों रुपये खर्च तो कर दिए, लेकिन आज तक यह तय नहीं कर सका कि इस सेंटर को चलाएगा कौन!
कूड़े का अंबार और जहरीला धुआं, जनता बेहाल
स्थिति यह है कि नगर पंचायत का कूड़ा इस सेंटर में लाने के बजाय मिल कॉलोनी के पास खुले में डंप किया जा रहा है। यहाँ कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लग चुके हैं, जिससे रोजाना बदबू फैलती है और स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है। इतना ही नहीं, कूड़े में आग लगा दी जाती है, जिससे जहरीला धुआं पूरे इलाके में फैल जाता है और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
मिल कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि जब से यह MRF सेंटर बना है, तब से आज तक इसका उपयोग नहीं हुआ। कई बार नगर पंचायत प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। प्रशासन की अनदेखी के कारण स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और जनता के पैसों का खुला दुरुपयोग हो रहा है।
नगर पंचायत प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
जब इस मामले पर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (EO) अजय कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि “नया पद आएगा और कर्मचारियों की भर्ती की जाएगी।” सवाल यह उठता है कि जब यह केंद्र बन रहा था, तब कर्मचारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई? लाखों रुपये खर्च करने से पहले इसकी रूपरेखा क्यों नहीं तैयार की गई? आखिर जनता के पैसों से बने इस केंद्र का लाभ लोगों को कब मिलेगा?
नगर पंचायत की यह लापरवाही न केवल जनता के साथ विश्वासघात है, बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है। अगर प्रशासन जल्द से जल्द ठोस कदम नहीं उठाता, तो यह परियोजना पूरी तरह से फेल हो जाएगी और लाखों रुपये की बर्बादी का एक और उदाहरण बनकर रह जाएगी।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे पर कब जागता है, या फिर यह केंद्र यूं ही बेकार पड़ा रहेगा और जनता इस अव्यवस्था की मार झेलती रहेगी।