कन्नौज में बस पलटने से सिद्धार्थ नगर निवासी की मौत, महेश जायसवाल का शव घर पहुँचते ही परिवार में मच गया कोहराम
📅 Published on: April 1, 2025
महेंद्र कुमार गौतम
बांसी सिद्धार्थ नगर
खेसरहा क्षेत्र के कोटिया पांडेय चौराहे पर रविवार देर रात जैसे ही महेश जायसवाल का शव पहुँचा, पूरे परिवार में सन्नाटा छा गया। उसके बाद जो मातमी माहौल बना, वह देखते ही बनता था। महेश की अकस्मात् मौत की खबर सुनकर न सिर्फ परिवार के लोग, बल्कि आसपास के गाँवों के लोग भी स्तब्ध रह गए। कन्नौज के पास हुए एक सड़क हादसे में उसकी जान चली गई थी। परिजनों ने सोमवार को उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
परिवार के सहारे थे महेश
महेश जायसवाल (पुत्र त्रिलोकी जायसवाल) मूल रूप से बेलबनवा निवासी थे, लेकिन पिछले कुछ समय से कोटिया पांडेय गाँव के चौराहे पर बने अपने नए मकान में परिवार के साथ रह रहे थे। वह वहीं एक कॉस्मेटिक्स की दुकान चलाकर घर-परिवार का भरण-पोषण करते थे। पाँच दिन पहले वह अपने रिश्तेदारों के साथ राजस्थान के सालासर बालाजी और खाटू श्याम के दर्शनों के लिए गए थे। लेकिन वापसी में उनकी जिंदगी का सफर अचानक खत्म हो गया।
दुर्भाग्यपूर्ण हादसा
शनिवार रात जब वे कन्नौज के पास वापस लौट रहे थे, तभी अचानक बस का टायर फट गया। इसके बाद बस डिवाइडर से जा टकराई और पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में महेश की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री भी घायल हुए।
शव आते ही मच गया कोहराम
रविवार रात करीब 10 बजे जब महेश का शव कोटिया पांडेय गाँव पहुँचा, तो उनकी पत्नी किसलावती और तीनों बच्चों—बेटी गीतांजलि (17), कृष्णा (12) और बेटा आशुतोष (15)—का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार के साथ-साथ पूरा गाँव भी इस दुख में शामिल हो गया। महेश पाँच भाइयों में दूसरे नंबर के थे और परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रहे थे। उनकी अचानक मौत ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।
सोमवार को उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ ने उनके प्रति लोगों के स्नेह और सम्मान को दर्शाया। परिवार अब इस गहरे सदमे से उबरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन महेश के जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, वह शायद ही कभी भर पाए।
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