डॉ ऑफ़ द मंथ में जानिए मजबूत हड्डियों का राज: ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ अविनाश से जानिए सही देखभाल और इलाज के तरीके

सेहतमंद जीवन के लिए मजबूत हड्डियां बेहद जरूरी हैं, लेकिन आजकल बदलती लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान के कारण हड्डी और जोड़ संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। घुटनों का दर्द, ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्पोर्ट्स इंजरी या रीढ़ की समस्याएं – ये सभी उम्रदराज लोगों के साथ-साथ युवाओं को भी प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में सही देखभाल, समय पर इलाज और जागरूकता बहुत जरूरी है।

रिपोर्टर ने ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ. अविनाश से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने हड्डियों की देखभाल, नई इलाज पद्धतियों और रोजमर्रा की गलतियों से बचने के उपाय बताए। आइए जानते हैं इस खास इंटरव्यू में उनकी महत्वपूर्ण सलाह।

nizam ansari 

प्रश्न: आपने ऑर्थोपेडिक्स को ही अपना करियर क्यों चुना?

ऑर्थोपेडिक्स मुझे इसलिए आकर्षित करता है क्योंकि यह मरीजों को दर्द से राहत देकर उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है। कई बार, सही इलाज से लोग दोबारा सामान्य जीवन जीने लगते हैं, और यही मेरे लिए सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत है।

प्रश्न: आजकल किस तरह की हड्डी या जोड़ संबंधी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिल रही हैं?

आजकल सबसे ज्यादा ऑस्टियोआर्थराइटिस, पीठ दर्द, स्लिप डिस्क, ऑस्टियोपोरोसिस और जोड़ों का दर्द देखने को मिलता है। युवाओं में खराब लाइफस्टाइल, ज्यादा स्क्रीन टाइम और व्यायाम की कमी के कारण गर्दन और पीठ दर्द की समस्या बढ़ रही है।

प्रश्न: ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस में क्या अंतर होता है?

ऑस्टियोआर्थराइटिस एक उम्र से जुड़ी बीमारी है, जिसमें हड्डियों के बीच की गद्दी (कार्टिलेज) घिस जाती है। यह अधिकतर बुजुर्गों में होता है।
रूमेटाइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है और इसमें सूजन व दर्द अधिक होता है।

प्रश्न: क्या लाइफस्टाइल में बदलाव करके हड्डियों की समस्याओं को कम किया जा सकता है?

जी हां, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और सही पोश्चर अपनाने से हड्डियों की समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। धूप में समय बिताना, विटामिन D और कैल्शियम युक्त भोजन लेना भी बहुत जरूरी है।

प्रश्न: घुटने या कूल्हे की रिप्लेसमेंट सर्जरी कब करानी चाहिए?

जब मरीज को लगातार दर्द हो, चलने-फिरने में कठिनाई हो, दवाओं और फिजियोथेरेपी से भी आराम न मिले, तब रिप्लेसमेंट सर्जरी का विचार किया जाता है। यह 60-80% मामलों में बेहद सफल रहती है और मरीज को फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद करती है।”

प्रश्न: क्या रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के लिए सर्जरी ही एकमात्र विकल्प है?

नहीं, कई मामलों में फिजियोथेरेपी, दवाएं और एक्सरसाइज से भी रीढ़ की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। सर्जरी सिर्फ उन्हीं मरीजों के लिए होती है, जिनकी हालत गंभीर हो, जैसे कि स्लिप डिस्क से पैरों में सुन्नपन या चलने में कठिनाई हो रही हो।

प्रश्न: नई तकनीकों जैसे रोबोटिक सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के क्या फायदे हैं?

रोबोटिक सर्जरी और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी से कम कट लगते हैं, कम खून बहता है और रिकवरी भी जल्दी होती है। ये आधुनिक तकनीकें सटीक और प्रभावी हैं, जिससे सर्जरी के नतीजे बेहतर होते हैं।

प्रश्न: बच्चों में हड्डी की कमजोरी को रोकने के लिए क्या करें?

बच्चों को कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर भोजन देना चाहिए, जैसे दूध, पनीर, हरी सब्जियां और नट्स। साथ ही, रोजाना खेल-कूद और धूप में समय बिताने से हड्डियां मजबूत बनती हैं।”

प्रश्न: बुजुर्गों में फ्रैक्चर के खतरे को कम करने के लिए क्या सलाह देंगे?

बुजुर्गों को घर में फिसलन से बचने के उपाय करने चाहिए, जैसे कि एंटी-स्लिप मैट का उपयोग और पर्याप्त रोशनी रखना। कैल्शियम और विटामिन D का सही स्तर बनाए रखना भी बहुत जरूरी है।

प्रश्न: क्या जिम में एक्सरसाइज करने से हड्डियों पर कोई बुरा असर पड़ सकता है?”

अगर सही फॉर्म और गाइडेंस के बिना वेटलिफ्टिंग की जाए तो इससे हड्डियों और जोड़ों को नुकसान हो सकता है। हमेशा प्रशिक्षित कोच की देखरेख में व्यायाम करें और वार्म-अप को न भूलें।

प्रश्न: हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए कौन-कौन से विटामिन और मिनरल जरूरी हैं?

कैल्शियम, विटामिन D, मैग्नीशियम और फास्फोरस हड्डियों के लिए सबसे जरूरी होते हैं। ये हमें दूध, दही, हरी सब्जियों, अंडे और मछली से मिल सकते हैं।

प्रश्न: क्या रोजाना दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं?

हां, दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स कैल्शियम से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों के लिए जरूरी है। लेकिन इसके साथ संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है।

प्रश्न: हड्डी से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए लोगों को किन गलतियों से बचना चाहिए?

लंबे समय तक बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान, शराब और गलत खानपान हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं। इन आदतों से बचना बहुत जरूरी है।

बताते चलें कि डॉ अविनाश एक ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं | जिन्होंने एमबीबीएस और ऑर्थोपेडिक्स में [डिग्री] की पढ़ाई पूरी की। पिछले पांच वर्षों सेन्ट्रल इंस्टिटयूट ऑफ आर्थोपेडिक वी.एम.एम.सी. सफदरजंग हॉस्पिटल में सेवा दे चुके हैं | स्पेशलिस्ट Opp. AIIMS नई दिल्ली स्पाइन एण्ड ज्वाइन्ट रिप्लेसमेन्ट आर्थोस्कोपी हड्डी, जोड़ एवं नस रोग विशेषज्ञ के तौर पर काम कर चुके हैं |

डॉ अविनाश आशिर्वाद हॉस्पिटल सनई सिद्धार्थ नगर में पार्ट टाइम बैठते हैं |