ज्ञान, चरित्र और नेतृत्व की मिसाल बना – कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात का पुरस्कार वितरण समारोह

गुरु जी की कलम से

चनरोटा, कपिलवस्तु (नेपाल):
शिवराज नगरपालिका वार्ड संख्या 5 स्थित कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात में एक भव्य, गरिमामयी एवं प्रेरणादायक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल पुरस्कार प्रदान करने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बालिकाओं के आत्मबल, धार्मिक चेतना और नेतृत्व कौशल को निखारने का एक सार्थक प्रयास था।

कार्यक्रम का आयोजन हिफ़्ज़-ए-अरबईन नववी प्रतियोगिता की सफलता के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें कुल्लियत की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस प्रतियोगिता का संचालन मौलाना वसीम अहमद मक्की की देखरेख में हुआ।

ज्ञान का दीप जलाते तीन संस्थान

कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात, जामिया सिराजुल उलूम अस्सलफियाह झंडानगर के अधीन एक उत्कृष्ट शाखा है, जो मौलाना शमीम अहमद नदवी के मार्गदर्शन में चनरोटा में तीन प्रमुख केंद्रों के रूप में संचालित है:

1. मदरसा ज़ियाउल उलूम अस्सलफियाह

2. मदरसा उस्मान बिन अ़फ्फान (हिफ़्ज़ विभाग)

3. कुल्लियतुज़ ज़हरा लिलबनात

यह संस्थाएं केवल शिक्षा नहीं, बल्कि चरित्र, चिंतन और धार्मिक पहचान के साथ ही मजबूर निर्माण कर रही हैं।

कार्यक्रम की विशेष झलकियाँ

समारोह की शुरुआत हिफ़्ज़ विभाग की एक छात्रा द्वारा प्रभावशाली कुरआन तिलावत से हुई।

इसके पश्चात हम्द और नअत की प्रस्तुतियों ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।

मंच संचालन का दायित्व फज़ीलतुल शैख मजीब मदनी ने अत्यंत भावपूर्ण शैली में निभाया।

प्रेरक वक्तव्य और मार्गदर्शन

मुख्य वक्ता फज़ीलतुल शैख अब्दुर रशीद मदनी (शैखुल जामिया) ने अरबईनीयाते हदीस पर गहन और प्रेरक भाषण दिया।
वहीं, फज़ीलतुल शैख वसीउल्लाह मदनी (कुल्लियतु आइशा सिद्दीका गर्ल्स कॉलेज, कृष्णानगर) ने हदीस की प्रमाणिकता और चरित्र निर्माण पर बल दिया।

समापन पर जामिया के प्रवक्ता मौलाना मशहूद खां नेपाली ने कहा:
यह छात्राएं किसी साधारण लक्ष्य का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उम्मत की नेतृत्वकर्ता हैं। ज्ञान को अमानत समझें और जीवन को समुदाय की सेवा हेतु समर्पित करें।

सम्मान और प्रोत्साहन

पाँच श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए।

अन्य प्रतिभागी छात्राओं को प्रोत्साहन उपहार देकर सम्मानित किया गया।

इनका रहा सराहनीय योगदान:

इस सफल आयोजन को सफल बनाने में जिनका प्रमुख योगदान रहा, वे हैं: मौलाना नसीफ सलफी, हाफ़िज़ अब्दुल मजीब असऱी, हाफ़िज़ महबूब सलफी हाफ़िज़ मोहम्मद आसिम सिराजी हाफ़िज़ अब्दुल हक़ सिराजी, मोहम्मद जुबैर सिराजी ,मास्टर रहमतुल्लाह, मास्टर नूरुल्लाह, तथा अन्य सभी शिक्षक व शिक्षिकाएं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि यह ज्ञान-दीप सदैव प्रकाशित रहे और इन संस्थाओं से निकलने वाली प्रतिभाएं उम्मत के लिए प्रकाशस्तंभ बनें।