नेपाल को पशुपतिनाथ या राजतंत्र ही बचा सकते हैं’ – नेपाल में राजशाही समर्थक का बयान

परमात्मा उपाध्याय 

कपिलवस्तु, नेपाल: नेपाल आज अपनी पहचान और अस्तित्व को बचाने के लिए एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। देश की राजनीतिक अस्थिरता, असक्षम सरकार और जनता का संविधान से घटता विश्वास यह साबित करता है कि नेपाल के राजनीतिक प्रयोग असफल रहे हैं। यह बात नेपाल के कपिलवस्तु से थानेश्वर अर्याल अच्युत ने कही, जो राज संस्था के प्रबल समर्थक हैं। उनका मानना है कि नेपाल को इन प्राकृतिक और कृत्रिम आपदाओं से या तो भगवान पशुपतिनाथ या फिर राजशाही का शासन ही बचा सकता है।

नेपाल का इतिहास और पहचान खतरे में

​अच्युत ने कहा कि नेपाल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान आज गहरे संकट में है। राष्ट्रीय मूल्यों, परंपराओं और आस्थाओं में गिरावट से राष्ट्र की आत्मा कमजोर होती जा रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसी जटिल परिस्थिति में, नेपाल को बचाने के लिए संवैधानिक राजतंत्र ही एकमात्र व्यवहारिक विकल्प है। उनके अनुसार, राजतंत्र नेपाल की अखंडता, पहचान और अस्तित्व की रक्षा कर सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील

​अच्युत ने भारत और अन्य पड़ोसी देशों के साथ-साथ पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे नेपाल को अपना भविष्य खुद तय करने दें। उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप और भू-राजनीतिक दबाव से मुक्त रहने की बात कही। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि नेपाल की जनता द्वारा शांतिपूर्ण ढंग से किए जा रहे प्रयासों का सम्मान किया जाए। यह प्रयास नेपाल के इतिहास, मूल्यों और जन-भावना के अनुरूप शासन प्रणाली को फिर से स्थापित करने के लिए किए जा रहे हैं।

​अंत में, उन्होंने कहा कि नेपाल हमेशा से एक स्वतंत्र और गौरवशाली राष्ट्र रहा है और आज भी नेपाली जनता यही चाहती है कि आत्मसम्मान, स्वतंत्रता और एकता के साथ देश को फिर से स्थिरता और समृद्धि की राह पर लाया जाए। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किए बिना, शांतिपूर्ण और जन-इच्छा पर आधारित परिवर्तन में सहयोग दें।