📅 Published on: September 28, 2025
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। ज़िले में राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) 730 पर गौहनिया से सनई तक सड़क निर्माण का काम 90 प्रतिशत से अधिक पूरा होने के बावजूद, बीच का करीब तीन किलोमीटर का हिस्सा लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन गया है। पूर्व मंत्री स्व. दिनेश सिंह के विद्यालय से लेकर बरगदवा से पहले तक यह महत्वपूर्ण हिस्सा अपनी पुरानी और अत्यधिक खराब स्थिति में ही छोड़ दिया गया है। यह छूटा हुआ खंड चिल्हिया थाने से सनई तिराहे तक के 18 किलोमीटर के कुल मार्ग का हिस्सा है, जहां कई महीनों से काम रुका हुआ है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के सूत्रों के मुताबिक, इस छूटे हुए तीन किलोमीटर के हिस्से में ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण होना है, और काम प्रगति पर है। हालांकि, ओवरब्रिज की धीमी निर्माण गति को देखते हुए अनुमान है कि इसे पूरा होने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है।
ओवरब्रिज निर्माण के कारण बढ़ी राहगीरों की मुश्किलें
ओवरब्रिज के निर्माण के चलते सड़क का यह बीच का हिस्सा बिना सुधार के छोड़ दिया गया है। इसका सीधा असर वहां से गुजरने वाले आम यात्रियों पर पड़ रहा है।
कमरतोड़ सड़क: गड्ढों और उबड़-खाबड़ सतह के कारण यह सड़क ‘कमरतोड़’ बन गई है।
बाइक सवारों की दुर्दशा: बाइक से सफर करने वालों को सबसे ज़्यादा दिक्कत हो रही है। इस रास्ते से गुजरने पर उनका शरीर थक जाता है और कपड़ों की स्थिति भी ठीक नहीं रहती।
वीआईपी पासिंग: ज़िले के आला अधिकारी भी इसी मार्ग से सफर करते हैं, लेकिन उनके आरामदायक वाहनों में ‘हचका’ (झटका) महसूस न होने के कारण उन्हें सड़क की वास्तविक खराब स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता होगा।
स्थानीय जनता और दैनिक यात्रियों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जब पूरे खंड का निर्माण हो रहा है तो बीच के इस छोटे से हिस्से को जर्जर स्थिति में क्यों छोड़ा गया है।
क्या जब तक ब्रिज का निर्माण नहीं हो जाता तब तक धूल फांकती रहेगी जनता
लोगों ने सोशल मीडिया पर सड़क के निर्माण की धीमी गति और प्रगति को लेकर प्रतिक्रिया दिखने लगी है। सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी (DM) महोदय और एनएच/एनएचएआई के अधिकारियों से स्थानीय लोगों ने निवेदन किया है कि जब तक ओवरब्रिज पूरी तरह से नहीं बन जाता, तब तक कम से कम इस लगभग तीन किलोमीटर छूटे हुए हिस्से को बराबर करवा दिया जाए। इससे बाइक और कार चालकों को यात्रा करने में कुछ सहूलियत मिल सकेगी और दुर्घटना का खतरा भी कम होगा।