📅 Published on: October 3, 2025
Kapilvastupost
सिद्दार्थनगर, उत्तर प्रदेश।
जनपद सिद्धार्थनगर के ढेबरुआ थाना क्षेत्र में एक नाबालिग किशोरी के कथित रूप से भगाए जाने के मामले में लगभग डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। पीड़ित परिवार अपनी बेटी की तलाश में जिलाधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की चौखट पर फरियाद कर चुका है, लेकिन पुलिस अभी तक नामजद अभियुक्तों से किशोरी को बरामद नहीं करवा पाई है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस को वह फोन नंबर तक उपलब्ध कराया है, जिससे उनके पास फोन आया था, इसके बावजूद मामले में पुलिस की शिथिलता संदेह पैदा कर रही है। पीड़ित ने अपनी तहरीर में यह आशंका जताई है कि उनकी नाबालिग बच्ची की जान को खतरा हो सकता है। भगाई गई किशोरी अपने साथ सोने के जेवर और लाखों रुपये भी ले गई है।
नाबालिग भगाने जैसे संगीन आरोप पर डेढ़ महीने तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जिम्मेदार अधिकारी का ‘रटा-रटाया’ जवाब
जब मीडिया ने इस मामले में क्षेत्राधिकारी (CO) शोहरतगढ़ से सच्चाई जाननी चाही, तो उनका रटा-रटाया जवाब मिला कि “मामले की अभी जांच चल रही है, इसलिए कोई बयान नहीं दिया जा सकता।” सिद्धार्थनगर में मीडिया को मुख्यालय जाकर जवाब लेने की यह आम प्रवृत्ति लोगों तक सच्चाई पहुंचने से रोकने की एक व्यवस्था के तौर पर देखी जा रही है।
पीड़ित परिवार लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है और उनकी चिंता बढ़ती जा रही है, खासकर जब उनकी नाबालिग बेटी के पास से लाखों रुपये और जेवरात भी गायब हैं।
बाईट- पीड़ित की मां