आस्था का महासूर्य! छठ पर्व पर डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, प्रकृति से जुड़ाव और जीवनदायिनी शक्ति का वंदन

गुरु जी की कलम से

बढ़नी, सिद्धार्थनगर।

​लोक आस्था का महापर्व छठ आज बढ़नी-सिद्धार्थनगर क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर व्रतियों ने अस्ताचलगामी (डूबते हुए) सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी पूजा की। छठ के पारंपरिक और मन को मोह लेने वाले गीत गली-मुहल्लों में गूंजने लगे हैं, जो लोक की सादगी, निश्छलता और भोलेपन को दर्शाते हुए अंतर्मन को छू रहे हैं।

​छठ पर्व मुख्य रूप से प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना का पर्व है। जैसा कि धर्म ग्रंथों में भी कहा गया है, हम कई देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, जिन्हें हमने देखा नहीं है और जिनकी उपस्थिति केवल कथाओं के माध्यम से महसूस की है। लेकिन सूर्य एक ऐसे देव हैं जो हमेशा हमारे सामने हैं। उनके देवत्व को स्वीकार करने के लिए किसी तर्क या प्रमाण की आवश्यकता नहीं है।

सूर्य: सृष्टि की आत्मा और जीवन का आधार

​सूर्य को समस्त सृष्टि की आत्मा माना गया है। ऋग्वेद में कहा गया है—‘सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च दृ’ अर्थात सूर्य ही सृष्टि की आत्मा हैं। यह पृथ्वी उन्हीं से जन्मी है, और यहां व्याप्त नमी, उर्वरता, हरियाली, सौंदर्य और जीवन—सब कुछ सूर्य की ही देन है। सूर्य के बिना न तो यह पृथ्वी संभव थी, न इसका सौंदर्य और न ही जीवन का विकास। यहां तक कि हमारे प्यारे चंद्रमा का सौंदर्य और शीतलता भी उन्हीं की अग्नि से है।

​छठ पर्व इसी जीवनदायिनी शक्ति को नमन करने का पर्व है। व्रती इस महाशक्ति को उनके अनंत उपकारों के बदले में क्या दे सकते हैं, इसलिए उनके ही दिए हुए नए अन्न, फल, दूध और नदियों के जल के साथ अर्घ्य समर्पित करते हैं। व्रती डूबते और उदीयमान दोनों रूपों में सूर्य को श्रद्धा के साथ अर्घ्य देते हुए प्रार्थना करते हैं कि वे इसे स्वीकार करें।

यह है सूर्य से कामना:

​इस पर्व के माध्यम से हम सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं कि वे हमें प्रकाश, ऊर्जा, बल, उर्वरता, जीवन, आरोग्य, हरियाली, वृक्ष, जंगल, अन्न-फल-फूल, बादल, वर्षा और नदियां प्रदान करें। इसके साथ ही, यह विवेक भी दें कि हम उनके अंश से बनी इस पृथ्वी और उसकी प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करें, ताकि अपनी आने वाली संतानों के लिए इसे बेहतर बनाकर जा सकें।

​कल (आगामी तिथि) सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस लोक महापर्व का समापन होगा।