पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मनमानी! विधायक विनय वर्मा ने प्रमुख सचिव से की शिकायत, 15 दिन में माँगी पाँच बिंदुओं पर रिपोर्ट

ऐसा लगता है जैसे पी डब्लू डी अधिकारियों को कोई शह दे रहा हो कि मेरे रहते तुम्हारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा ऐसी स्थित में क्या होगा या हो रहा है आसानी से बुझा जा सकता है।

Kapilvastupost

​शोहरतगढ़ के विधायक विनय वर्मा ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों पर शिकायतों को अनसुना करने और सरकार की छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान से मुलाकात कर एक शिकायती पत्र सौंपा है।

​विधायक ने प्रमुख सचिव से 15 दिनों के भीतर पाँच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और कार्रवाई की मांग की है।

​काली सूची में दर्ज फर्म के ठेकेदार से मुलाकात पर सवाल

​विधायक विनय वर्मा ने अपनी शिकायत में PWD के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज़ जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक फर्म को विभाग की ओर से काली सूची (Blacklisted) में डाला गया है, तो उस फर्म के ठेकेदार के साथ उक्त अधिशासी अभियंता की जिला मुख्यालय स्थित रेस्ट हाउस में मुलाकात क्यों हुई। विधायक ने कहा कि विभागीय अधिकारी अपने कृत्यों से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

​माँगी गई जाँच और कार्रवाई के मुख्य बिंदु

​विधायक वर्मा ने प्रमुख सचिव से जिन पाँच मुख्य बिंदुओं पर 15 दिन में जानकारी और कार्रवाई की मांग की है, वे इस प्रकार हैं:

  • जाँच की मांग: मार्च 2022 से अब तक शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में स्वीकृत हुए PWD विभाग के सभी कार्यों (शिलान्यास/लोकार्पण सहित) की जाँच किसी अन्य वृत्त के मुख्य अभियंता से कराई जाए।

  • टेंडर पूलिंग पर कार्रवाई: प्रांतीय और इटवा खंड के विभिन्न टेंडरों में टेंडर पूलिंग की जो-जो शिकायतें मिली हैं, उनकी जाँच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

  • डोई नाला बाईपास का कार्य: शोहरतगढ़ के डोई नाला बाईपास का कार्य नौ माह पहले स्वीकृत होने के बावजूद अभी तक शुरू क्यों नहीं हुआ है।

  • अधूरे कार्य: क्षेत्र के कई अन्य कार्य भी आधे-अधूरे क्यों छोड़े गए हैं।

  • दोषी अधिकारी पर कार्रवाई: काली सूची में डाली गई फर्म के ठेकेदार के साथ मिलीभगत के आरोपी अधिशासी अभियंता के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई है।

​विधायक विनय वर्मा की इस पहल के बाद, अब सभी की निगाहें प्रमुख सचिव अजय चौहान के अगले कदम और 15 दिन के भीतर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।