सिद्धार्थनगर: ऑनलाइन हाजिरी के विरोध में ‘डिजिटल स्ट्राइक’, शोहरतगढ़ और बढ़नी ब्लॉकों के साथ ही जिले भर के सचिवों ने जमा किए डोंगल

निज़ाम अंसारी 
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में पंचायत सचिवों और सरकार के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया है। ऑनलाइन उपस्थिति (FRS) और बढ़ते कार्यभार के विरोध में शोहरतगढ़ और बढ़नी ब्लॉक के सचिवों ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने ‘डोंगल’ (डिजिटल सिग्नेचर) ब्लॉक प्रशासन को सौंप दिए हैं। सचिवों के इस सामूहिक बहिष्कार से जिले की सैकड़ों ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त का भुगतान पूरी तरह ठप हो गया है।

ब्लॉक दर ब्लॉक विरोध की गूँज

बढ़नी ब्लॉक: प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर 1 दिसंबर से चल रहे ‘सत्याग्रह’ के तहत सचिवों ने एडीओ पंचायत राम विलास को डोंगल सौंपे। सचिवों ने स्पष्ट किया कि 15 दिसंबर की समयसीमा बीतने के बाद भी मांगें पूरी न होने पर यह कदम उठाया गया है।
* शोहरतगढ़ ब्लॉक: यहाँ भी सचिवों ने प्रभारी एडीओ पंचायत गौरव श्रीवास्तव को डोंगल सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की। सचिवों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए सरकार की नीतियों को अव्यावहारिक बताया।

क्यों थमी पंचायतों की रफ़्तार?

डोंगल जमा होने का सीधा अर्थ है कि अब ग्राम पंचायतों में किसी भी विकास कार्य, मानदेय या वेंडर का डिजिटल भुगतान नहीं हो सकेगा। सचिवों का कहना है कि:
अव्यावहारिक उपस्थिति: फील्ड में नेटवर्क की समस्या और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन हाजिरी संभव नहीं है।
काम का बोझ: सचिवों पर 29 से अधिक विभागों का अतिरिक्त कार्यभार है, जिससे मूल विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

तकनीकी बाधा: तकनीकी खामियों के चलते यह प्रणाली शासकीय कार्यों में सुधार के बजाय बाधा उत्पन्न कर रही है।
“हम सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों और व्यावहारिक चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डोंगल जमा करना हमारी मजबूरी है क्योंकि वर्तमान व्यवस्था में काम करना असंभव है।

प्रमुख उपस्थिति बढ़नी में: मोहम्मद नियाज, उदय प्रताप गौतम, शकील अहमद, रविकान्त यादव, अवधेश कुमार यादव, अनुपम सिंह, संजय कुमार, दिलीप कुमार और शीला पटेल।
शोहरतगढ़ में: राम सिंह, रामस्वरूप गुप्ता, अजय भारतीया, कामेश्वर मिश्र, गौरव श्रीवास्तव, संदीप सरोज, निशा श्रीवास्तव और लालचंद चौधरी।

सचिवों ने चेतावनी दी है कि जब तक ऑनलाइन उपस्थिति और गैर-विभागीय कार्यों के आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन के उच्च पदाधिकारियों के निर्देश पर अब जिले स्तर पर बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है।