सावधान! कड़ाके की ठंड में बढ़ रहा है ‘फेशियल पैरालिसिस’ का खतरा, बिना टोपी-मफलर निकलना पड़ सकता है भारी – डॉ सुभाष यादव

चेहरे का लकवा पूरी तरह ठीक हो सकता है, बशर्ते समय पर अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क कर इलाज और नियमित व्यायाम शुरू किया जाए। डॉ. सुभाष यादव, वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट

Nizam Ansari 
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। ठंड के इस मौसम में सिर और कान खुले रखकर बाहर निकलना लकवे (पैरालिसिस) का कारण बन रहा है।

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला चिकित्सालय के विशेषज्ञों के अनुसार, चेहरे की नसों पर ठंड का सीधा प्रहार लोगों को अपना शिकार बना रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे मामले
अस्पताल के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुभाष यादव ने बताया कि पिछले छह महीनों में लकवा (विशेषकर फेशियल पैरालिसिस) के करीब 30 से 40 नए मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इस बीमारी से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
क्यों मार रहा है लकवा? (मुख्य कारण)
डॉ. यादव के अनुसार, लकवे के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
* अत्यधिक ठंड: सुबह-शाम चलने वाली बर्फीली हवाओं के सीधे संपर्क में आना।
* संक्रमण: गंदे पानी के सेवन से होने वाला ‘हेरपेस वायरस’ का संक्रमण।
* लापरवाही: बिना कान ढके या बिना टोपी-मफलर के बाहर निकलना, जिससे कान के पीछे की नसें प्रभावित होती हैं।
इन लक्षणों को नजर अंदाज न करे।

डॉ सुभाष ने बताया अगर चेहरे में निम्नलिखित बदलाव दिखें, तो यह लकवे का संकेत हो सकता है:
* पलकें झपकाने या पूरी तरह बंद करने में दिक्कत होना।
* मुंह खोलने या बोलने में परेशानी महसूस होना।
* चेहरे के एक हिस्से में तेज दर्द।
* याददाश्त से जुड़ी समस्याओं का अनुभव होना।
“ठंड के मौसम में सुबह और शाम के समय ठंडी हवाओं के बीच निकलना जोखिम भरा है।

बचाव के लिए क्या करें?
* बाहर निकलते समय टोपी और मफलर से कान और सिर को अच्छी तरह ढकें।
* ठंडी हवाओं के सीधे संपर्क में आने से बचें।
* साफ और गुनगुने पानी का सेवन करें।
* लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, देरी करना खतरनाक हो सकता है।