मनरेगा का नाम बदलने और नए बिल के विरोध में कांग्रेस का हल्लाबोल; कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर, 22 दिसंबर। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लोकसभा में मनरेगा (MGNREGA) से संबंधित नया बिल पेश किए जाने और योजना का नाम बदलने की कथित साजिश के खिलाफ आज सिद्धार्थनगर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष काजी सुहेल अहमद के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर नारेबाजी की और सरकार के इस कदम को “गरीब विरोधी” करार दिया।

गांधी जी की तस्वीर लेकर सड़क पर उतरे कांग्रेसी
दोपहर करीब 12:30 बजे, कांग्रेस कार्यकर्ता हाथों में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर लेकर जिला कार्यालय से रवाना हुए। “मनरेगा विरोधी यह सरकार नहीं चलेगी” और “गांधी जी का अपमान बंद करो” जैसे नारों के साथ कार्यकर्ताओं का जत्था कलेक्ट्रेट पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के तेवर काफी आक्रामक दिखे, हालांकि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहा।

मजदूरों की जीवनरेखा पर हमला
सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष काजी सुहेल अहमद ने कहा, “लोकसभा में पेश किया गया नया बिल मजदूरों के अधिकारों को कुचलने की एक सोची-समझी साजिश है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के गरीब और किसान की जीवनरेखा है। नाम बदलने का प्रयास सीधे तौर पर महात्मा गांधी के विचारों और उनकी विरासत को मिटाने की कोशिश है।

जिला उपाध्यक्ष अनिल सिंह अन्नू, सादिक अहमद और बदरे आलम ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा गरीबों से उनका हक छीनना चाहती है, जिसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।

बताते चलें कि मनरेगा में बदलाव की ‘नई नीति’ से होने वाले 3 बड़े नुकसान हैं। कांग्रेस और विशेषज्ञों द्वारा इस नए बिल और नीतिगत बदलावों को लेकर जो चिंताएं जताई जा रही हैं, उनमें तीन प्रमुख नुकसान निम्नलिखित हैं।
कानूनी गारंटी का खत्म होना: उपाध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा मनरेगा की सबसे बड़ी ताकत इसका ‘कानूनी अधिकार’ होना है (मांग करने पर 100 दिन का काम)। विशेषज्ञों का मानना है कि नए बदलावों के बाद यह एक अधिकार-आधारित योजना के बजाय केवल एक ‘सरकारी फंड’ वाली स्कीम बनकर रह सकती है, जिससे सरकार बजट में कटौती कर पाएगी।

वरिष्ठ नेता बदरे अलम ने कहा मजदूरी और भुगतान में देरी: नई नीति के तहत आधार-आधारित भुगतान प्रणाली और केंद्रीकृत नियंत्रण से ग्रामीण इलाकों में तकनीकी जटिलताएं बढ़ेंगी। इससे पहले से ही संघर्ष कर रहे मजदूरों को समय पर मजदूरी मिलने में और अधिक कठिनाई हो सकती है।

युवा नेता सादिक अली ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का पतन: मनरेगा ग्रामीण भारत में ‘सुरक्षा जाल’ (Safety Net) का काम करता है। यदि इसके स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की गई, तो गांवों से शहरों की ओर पलायन (Migration) तेजी से बढ़ेगा और ग्रामीण विकास की गति रुक जाएगी।

सड़क से संसद तक आंदोलन की चेतावनी

जिला महासचिव सतीश चन्द्र त्रिपाठी, राजन श्रीवास्तव और युवा कांग्रेस अध्यक्ष पंकज चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो यह आंदोलन केवल जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे संसद तक ले जाया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से जिल्ले गालिब, पवन पांडेय, रियाज़ मनिहार, सुदामा प्रसाद, होरी लाल श्रीवास्तव, रितेश त्रिपाठी, मुकेश चौबे, शाहिद प्रधान, रियाजउद्दीन राईनी, उजैर खान, दिवाकर त्रिपाठी, रिजवान खान, मोहम्मद आसिफ, विज्ञानी बाबा, दिलीप कुमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।https://www.patrika.com/patrika-special/air-pollution-to-water-pollution-water-purifiers-to-air-purifiers-cost-effect-to-common-man-20191072