📅 Published on: December 23, 2025
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर (बढ़नी): पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। हाल ही में मैमनसिंह शहर में एक हिंदू युवक की बर्बर हत्या के बाद जनपद के सीमावर्ती कस्बे बढ़नी में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरि के नेतृत्व में सैकड़ों नागरिकों ने जनआक्रोश रैली निकालकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
मैमनसिंह की घटना ने बढ़ाया गुस्सा रैली के दौरान वक्ताओं ने हाल ही में बांग्लादेश के मयमनसिंह(Mymensingh) में हुई हृदयविदारक घटना का जिक्र किया। यहाँ 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) कर दी गई थी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ईशनिंदा के झूठे आरोपों में निर्दोषों को निशाना बनाना मानवता पर कलंक है।
बांग्लादेश सरकार की अब तक की कार्यवाही
खबरों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय दबाव और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार हरकत में आई है:
गिरफ्तारियां: बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैमनसिंह पुलिस ने अब तक इस हत्याकांड के सिलसिले में 7 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सरकारी बयान: मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की सरकार ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि “नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है” और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
भारत का रुख: भारत सरकार ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है।
माल गोदाम रोड पर गूंजे ‘बांग्लादेश मुर्दाबाद’ के नारे
बढ़नी में निकाली गई रैली मॉल गोदाम रोड से शुरू होकर कस्बे के मुख्य मार्गों से गुजरी। प्रदर्शनकारियों ने “बांग्लादेश मुर्दाबाद” और “रोहिंग्या वापस जाओ, देश बचाओ” के नारों के साथ अपना आक्रोश प्रकट किया।
रैली का नेतृत्व कर रहे नगर पंचायत अध्यक्ष सुनील अग्रहरि ने केंद्र सरकार से मांग की कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाकर वहां रह रहे हिंदुओं की जान-माल की रक्षा सुनिश्चित करें।
शांतिपूर्ण ढंग से निकाली गई इस रैली में प्रमुख रूप से:राजकुमार उर्फ राजू शाही (भाजपा नेता), ग्राम प्रधान अजय प्रताप यादव,संजय मित्तल, त्रियुगी अग्रहरि, ध्रुव चतुर्वेदी, कन्हैया मित्तल, गणेश अग्रहरि व मुन्नू मौर्य सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल रहे।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बंद नहीं हुए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।