📅 Published on: January 1, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में सरकारी राशन व्यवस्था एक बार फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। तहसील बांसी के खेसरहा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बनकेगांव में कोटेदार द्वारा राशन की खुलेआम कालाबाजारी और कार्डधारकों के शोषण का गंभीर मामला प्रकाश में आया है।
पुराना ‘खिलाड़ी’, नया चेहरा: फिर वही धांधली
ग्रामीणों का आरोप है कि इस दुकान का इतिहास ही विवादों से भरा रहा है। पहले यह राशन दुकान वर्तमान कोटेदार के पति समीउल्लाह के नाम थी, जिसे कालाबाजारी की शिकायतों के चलते पूर्व में निरस्त कर दिया गया था। लेकिन सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर वही दुकान अब पत्नी के नाम आवंटित करा ली गई है।
चेहरे बदल गए, लेकिन भ्रष्टाचार का पुराना खेल एक बार फिर जोर-शोर से जारी है।
साहब को पैसा देना पड़ता है” – धौंस और कटौती
कार्डधारकों ने कोटेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि हर महीने राशन में भारी कटौती की जाती है। जब ग्रामीण विरोध करते हैं, तो उन्हें यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि— “साहब को पैसा देना पड़ता है, जो मिल रहा है ले लो, वरना वो भी नहीं मिलेगा।
इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने तौल में धोखाधड़ी का भी खुलासा किया। उनके अनुसार, कोटेदार पहले एक कांटे से सही तौल दिखाती है और फिर दूसरे कांटे का उपयोग कर कम राशन थमा देती है।
कोटेदार मनमानी कर रही है, पूरा राशन नहीं देती। शिकायत करने पर ग्रामीणों को धमकाया जाता है। गरीबों का हक सरेआम मारा जा रहा है। मोहब्बत अली, ग्राम प्रधान
प्रशासनिक सुस्ती पर उठे सवाल
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी (SDM) बांसी को शपथ-पत्र और महजरनामा सौंपा था। इसके बाद 23 दिसंबर 2025 को जांच अधिकारी गांव पहुंचे और बयान भी दर्ज किए। लेकिन हफ्ता बीत जाने के बाद भी अब तक न तो दुकान निरस्त हुई और न ही कोई FIR दर्ज की गई, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
पूरा राशन मांगने पर कोटेदार कहती है कि नहीं मिलेगा, ज्यादा बोलोगे तो नाम कटवा दिया जाएगा। संदीप प्रजापति, कार्ड धारक
अधिकारी का पक्ष: जल्द होगी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण पर जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) देवेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ा रुख अपनाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा:
मामले की जांच की जा रही है। गांव में खुली बैठक आयोजित की जाएगी। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो कोटेदार का कोटा तत्काल प्रभाव से निरस्त कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन वास्तव में गरीबों के हक की रक्षा करेगा, या रसूखदार कोटेदार के आगे यह जांच भी फाइलों में दबकर रह जाएगी? बनकेगांव के ग्रामीण अब इंसाफ की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं।