📅 Published on: January 3, 2026
Niyamtullah khan
सिद्धार्थनगर : इटवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत कम्हरिया में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा मामला सामने आया है। मनरेगा योजना के तहत चार अलग-अलग परियोजनाओं की जांच में 1,06,313 रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई है। इस मामले में ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक को दोषी पाया गया है।
प्रमुख बिंदु: जांच में क्या खुलासे हुए?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत कम्हरिया में विकास कार्यों के नाम पर भारी धांधली की गई है:
* फर्जी मस्टररोल: कई श्रमिकों के अंगूठे के निशान एक जैसे पाए गए, जिससे फर्जी हाजिरी का संदेह गहरा गया है। किसी भी अंगूठे के निशान का प्रमाणीकरण नहीं मिला।
* अधूरा कार्य: तालाबों की खुदाई और सफाई में मानकों की अनदेखी की गई। माप पुस्तिका (MB) सक्षम स्तर से निर्गत नहीं थी।
* गायब साक्ष्य: पत्रावली में आवश्यक ‘तीन स्तरीय फोटोग्राफ’ सुरक्षित नहीं मिले। साथ ही, मौके पर मिट्टी की मात्रा भी कागजों की तुलना में कम पाई गई।
वसूली के आदेश और सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किए हैं:
* प्रधान से वसूली: कुल गबन की राशि का एक-तिहाई हिस्सा यानी 35,438 रुपये ग्राम प्रधान मो. फारूक से वसूला जाएगा।
* समय सीमा: प्रधान को यह राशि तीन माह के भीतर जमा करनी होगी। ऐसा न करने पर राजस्व बकाया (RC) की तरह वसूली की जाएगी।
नोटिस का जवाब नहीं: प्रशासन द्वारा जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ का ग्राम प्रधान और सचिव की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
विभागीय जांच की पुष्टि
बस्ती मंडल के मंडलीय प्राविधिक परीक्षक द्वारा कराई गई जांच को जिला लेखा परीक्षा अधिकारी ने भी सही माना है। 7 अगस्त 2025 को दी गई रिपोर्ट के आधार पर अब कानूनी रूप से वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।