📅 Published on: February 8, 2026
Kapilvastupost
शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर): उत्तर प्रदेश के राजस्व विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक जीवित व्यक्ति को सरकारी दस्तावेजों में ‘मृत’ घोषित कर उसकी कीमती पुश्तैनी जमीन की वरासत किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दी गई। पीड़ित पिछले पांच साल से खुद को जिंदा साबित करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
संपूर्ण समाधान दिवस में खुला राज
शनिवार को शोहरतगढ़ तहसील में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ में उस समय हड़कंप मच गया, जब चिलहिया थाना क्षेत्र के कापिया खालसा निवासी संतराम ने डीएम शिवशरणप्पा जीएन के सामने पेश होकर कहा— “साहब, मैं आपके सामने खड़ा हूं, लेकिन तहसील के रिकॉर्ड में पांच साल पहले ही मर चुका हूं।”
पीड़ित ने बताया कि साजिश के तहत उसे तहसील के अभिलेखों में मृत दिखाकर उसकी भूमि का वरासत (उत्तराधिकार ट्रांसफर) किसी दूसरे गांव के निवासी के नाम कर दिया गया।
लेखपाल और भू-माफियाओं की मिलीभगत का आरोप
संतराम का आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल ने बिना मौका मुआयना किए और बिना किसी सत्यापन के कागजों पर उसे मृत दिखा दिया। यही नहीं, उसकी पत्नी की मृत्यु के बाद जमीन का जो हिस्सा उसके तीन बेटों के नाम होना चाहिए था, उसमें भी हेरफेर कर बाहरी लोगों का नाम दर्ज कर दिया गया।
डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। डीएम ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में इस तरह की गड़बड़ी अक्षम्य है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पीड़ित की जमीन उसे वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
साथ ही, समाधान दिवस में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने का भी निर्देश दिया गया है।