सिद्धार्थनगर: पटना गांव में तालाब की नीलामी का विरोध, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

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इटवा, सिद्धार्थनगर।
तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत पटना में मत्स्य पालन हेतु तालाब की 10 वर्षीय पट्टा नीलामी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम प्रधान के नेतृत्व में भारी संख्या में ग्रामीणों ने एसडीएम (SDM) और तहसीलदार को प्रार्थना पत्र सौंपकर इस नीलामी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।

भ्रष्टाचार और चोरी-छिपे नीलामी का आरोप
ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि तहसील के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से गाटा संख्या 57 के इस प्राचीन तालाब की नीलामी चोरी-छिपे करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, इस प्रक्रिया की न तो कोई सार्वजनिक ‘डुग्गी-मुनादी’ कराई गई और न ही वर्तमान ग्राम प्रधान या भूमि प्रबंधन समिति को इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई।

धार्मिक और सामाजिक महत्व का हवाला
तालाब को बचाने के पीछे ग्रामीणों ने कई महत्वपूर्ण तर्क दिए हैं:
* धार्मिक आस्था: तालाब के समीप एक प्राचीन मंदिर है, जहाँ ग्रामीण स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं।
* पशुधन की सुरक्षा: भीषण गर्मी में जब अन्य जलस्रोत सूख जाते हैं, तब पटना और आसपास के गाँवों के मवेशी इसी तालाब से पानी पीते हैं।
* कृषि और सिंचाई: इस तालाब के पानी का उपयोग स्थानीय किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए भी करते हैं।
प्रशासनिक चेतावनी: ‘हाईकोर्ट तक जाएंगे ग्रामीण’
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि एसडीएम स्तर पर नीलामी नहीं रुकी, तो वे जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर से मुलाकात करेंगे। इसके बाद भी समाधान न होने पर उन्होंने सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है।
इस मामले पर एसडीएम कुणाल ने बताया कि उन्हें प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है और नियमानुसार उचित कार्यवाही की जाएगी। वहीं, अपर जिलाधिकारी ने भी आश्वस्त किया है कि वे एसडीएम इटवा से इस संबंध में बात करेंगे और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा।