📅 Published on: March 21, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। जनपद के शिया बाहुल्य क्षेत्र कस्बा हल्लौर में शनिवार को ईद-उल-फितर की नमाज एक अलग और भावुक मंजर के बीच संपन्न हुई। सुबह से हो रही बारिश के कारण नमाज मस्जिदों के भीतर अदा की गई। इस वर्ष ईद की खुशियों पर शोक की लहर हावी रही, जिसका मुख्य कारण ईरान के सर्वोच्च नेता और शिया समुदाय के सम्मानित धर्मगुरु अयातुल्लाह अली खामनेई की शहादत की खबर रही।
विरोध और एकजुटता का अनोखा प्रदर्शन
मस्जिद-ए-जाफरिया में नमाज की इमामत मौलाना शाहकार हुसैन जैदी ने की। इस दौरान एक विशेष दृश्य देखने को मिला—नमाजियों ने अपने हाथों पर काली पट्टियां बांध रखी थीं। यह काली पट्टियां न केवल अपने रहनुमा के प्रति शोक का प्रतीक थीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर हो रहे अन्याय के खिलाफ एक मौन विरोध भी थीं। नमाज के बाद देश और दुनिया में अमन-चैन के साथ-साथ मजलूमों की हिफाजत के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं।
साम्राज्यवाद के खिलाफ फूटा गुस्सा
नमाज के बाद उपस्थित जनसमूह ने अमेरिका और इजरायल की विस्तारवादी और साम्राज्यवादी नीतियों के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त किया। वक्ताओं और नमाजियों का कहना था कि मध्य-पूर्व में अस्थिरता के लिए यही शक्तियां जिम्मेदार हैं। विशेष रूप से यह चर्चा रही कि वर्ष 1945 के बाद से जिस तरह अमेरिका ने वैश्विक स्तर पर ‘दादागिरी’ की नीति अपनाई है, उसे ईरान जैसे देशों ने डटकर चुनौती दी है और उनकी नीतियों को धूल चटाई है।
वैश्विक समर्थन और बदलता समीकरण
प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज दुनिया दो धड़ों में बंट चुकी है। जहां एक तरफ अमेरिका और इजरायल का गठबंधन है, वहीं दूसरी तरफ रूस, चीन और कई दक्षिण अमेरिकी व एशियाई देश हैं जिन्होंने उनकी नीतियों का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया है। नमाजियों ने कहा कि फिलिस्तीन और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकारों के हनन पर चुप्पी साधने वाले देश भी इस गुनाह में बराबर के शरीक हैं।
इस अवसर पर मुख्य रूप से सलमान मेंहदी, मोहम्मद मेंहदी, आमिर रिजवी, ताकीब रिज़वी, हसन रिजवी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रशासन की मुस्तैदी के बीच पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।