📅 Published on: May 11, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: तहसील क्षेत्र के ग्राम बसडिलिया स्थित आस्ताने शहीद-ए-मिल्लत में शनिवार की रात उर्स के पावन अवसर पर ‘शहीद-ए-मिल्लत कॉन्फ्रेंस’ का शानदार आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के नामचीन उलेमाओं और वक्ताओं ने शिरकत की, जहाँ अकीदतमंदों ने मज़ार शरीफ पर चादरपोशी कर देश में अमन-चैन और खुशहाली की दुआएं मांगी।
दीन और दुनियावी तालीम पर जोर
मुख्य वक्ता **गुलाम रसूल बाल्यावी** ने अपने संबोधन में समाज में सुधार और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को आज के दौर में दीनी (धार्मिक) और दुनियावी (आधुनिक) दोनों शिक्षाओं में अव्वल आना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा:
बुराइयों का त्याग: इंसान को अपने भीतर की कमियों को खत्म कर नेकी का रास्ता चुनना चाहिए।
परवरिश की अहमियत: मां-बाप बच्चे की पहली पाठशाला हैं। नेक माता-पिता ही एक नेक समाज की नींव रखते हैं।
दहेज प्रथा का विरोध: दहेज लेना और देना, दोनों ही गुनाह हैं। एक आदर्श समाज के निर्माण के लिए इस कुरीति को जड़ से खत्म करना अनिवार्य है।
सेवा और सादगी ही कामयाबी का रास्ता
कॉन्फ्रेंस को खिताब करते हुए **सैय्यद जामी अशरफ** ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को दीन की राह पर लाना और दुनिया में मानवता की सेवा करना है। उन्होंने फिजूलखर्ची और दिखावे से बचने की नसीहत देते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, वही दुनिया का सबसे सुखी इंसान है। वहीं, **हाफिज अरबाब फारूकी** ने युवाओं से अपील की कि वे भटकने के बजाय मस्जिदों को आबाद करें और सच्चाई के मार्ग पर चलें।
सांस्कृतिक और रूहानी रंग
कार्यक्रम की शुरुआत हाफिज कारी आरिफ मुशाहिदी ने तिलावते कलाम पाक (कुरान की आयतों) से की। इसके बाद फैजान फारूकी, अहमद इफ्ताह और नवीना शायर मोहसिन रजा ने अपनी नात और कलाम से माहौल को रूहानी और खुशनुमा बना दिया। गुलाम गौस गजाली ने भी अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
प्रोग्राम की अध्यक्षता मौलाना मकसूद अकरम ने की और सफल संचालन हाफिज दिलशाद फारूकी द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।