बढ़नी कस्बे में महाजाम का तांडव: 4 घंटे थमी रही जिंदगी, तपती धूप में बेहाल हुए राहगीर
📅 Published on: June 2, 2026
गुरु जी की कलम से
बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। बढ़नी कस्बे में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर आ चुकी है। सोमवार को दोपहर बाद पूरा बढ़नी कस्बा एक बार फिर भीषण जाम की चपेट में आ गया। मेन रोड पर करीब चार घंटे तक गाड़ियां जहां की तहां थमी रहीं। बस स्टॉप से लेकर नेपाल बॉर्डर तक सैकड़ों गाड़ियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इस तपती दुपहरिया और भीषण गर्मी में लोग बूंद-बूंद पानी और राहत के लिए तरस गए, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई सुध लेने वाला नहीं था।
4 घंटे बंद रहता है रेलवे फाटक, नेपाल बॉर्डर पर क्लियरेंस की सुस्त चाल
कस्बे में जाम की समस्या सिर्फ अंदरूनी अव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ बड़े तकनीकी और प्रशासनिक कारण भी हैं:
रेलवे फाटक की दोहरी मार: दिन के 12 घंटों में से करीब 4 घंटे तो रेलवे फाटक ही बंद रहता है। ट्रेनों के आवागमन के कारण बार-बार फाटक बंद होने से दोनों तरफ वाहनों का भारी दबाव बन जाता है, जिससे नागरिकों का समय और ईंधन दोनों का भारी नुकसान हो रहा है।
नेपाल बॉर्डर पर क्लियरेंस में देरी:** इसके अलावा, नेपाल जाने वाली भारतीय कमर्शियल गाड़ियों को बॉर्डर पर क्लियरेंस प्रक्रिया (Customs Clearance) में कई-कई घंटों की देरी का सामना करना पड़ता है। जब तक वहां से गाड़ियां आगे नहीं बढ़तीं, तब तक पीछे कस्बे की सड़कों पर ट्रकों का बैकअप लग जाता है, जो महाजाम का रूप ले लेता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का फूटा गुस्सा
जाम के इस झाम में आम जनता के साथ-साथ स्थानीय संभ्रांत नागरिक और पूर्व जनप्रतिनिधि भी घंटों फंसे रहे।
“मैं खुद लगभग चार घंटे से इस भीषण जाम में फंसा रहा। मेरी आंखों के सामने कई परिवार इस तपती दुपहरिया में गर्मी से बेहाल होते रहे। यह सीधे तौर पर प्रशासन की लापरवाही है। बाहर से आने वाले भारी ट्रकों को बिना किसी ट्रैफिक मैनेजमेंट के बेतरतीब तरीके से कस्बे के भीतर भेज दिया जाता है। जब भारी मात्रा में ट्रकों का इनफ्लो होगा, तो जाम लगना स्वाभाविक है।”
**निसार बागी (पूर्व चेयरमैन, बढ़नी)**
“जाम की स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि कई बार जीवन-मौत से जूझ रहे मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस भी इसमें फंस जाती हैं। इस गंभीर समस्या को हल करने में स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से फेल साबित हुआ है।”
**राजकुमार अग्रहरि (पूर्व सभासद, गोलाबाजार)**
**पंकज चतुर्वेदी (निवासी, कल्लनडिहवा):** “यह जाम अब बढ़नी कस्बे के लोगों के लिए एक अभिशाप बन चुका है। रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह से तबाह हो गई है।”
* **मनीष चौधरी (निवासी, मिल कालोनी):** “बढ़नी में जाम का मतलब है घंटों का इंतजार। हमारी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का कोई स्थाई समाधान निकालें।”
निष्कर्ष और मांग
कस्बे के लोगों का कहना है कि जब तक बाहर से आने वाले लोडिंग ट्रकों के लिए नो-एंट्री का समय निर्धारित नहीं किया जाता, रेलवे ओवरब्रिज (ROB) की दिशा में ठोस काम नहीं होता और बॉर्डर क्लियरेंस प्रक्रिया को तेज नहीं किया जाता, तब तक बढ़नी को इस अभिशाप से मुक्ति नहीं मिलेगी। कस्बावासियों ने जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है।


