प्राइम टाइम स्पेशल – जौहर विश्वविद्यालय पर फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर: कमिश्नर कोर्ट से आजम खान को मिली बड़ी राहत, ध्वस्तीकरण आदेश पर लगी रोक

सत्ता का जितना दुरुपयोग वर्तमान शासन में हो रहा है उतना किसी शासन में नहीं हुआ । सत्ता में बैठे लोग यह क्यों भूल जाते हैं कि उन्हें कुर्सी पर इसलिए बैठाया गया है कि वह जनता के हित में कार्य करें उनके लिए अच्छी योजनाएं बनाएं।

गुरु जी की कलम से
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म ख़ान को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर कोर्ट ने विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। इस आदेश के बाद फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं हो सकेगी।
**क्या है पूरा मामला?**
यह मामला पिछले कुछ वर्षों से लगातार कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जौहर विश्वविद्यालय की भूमि, निर्माण और उसके स्वामित्व को लेकर विभिन्न स्तरों पर कानूनी विवाद चल रहे हैं। प्रशासन की ओर से विश्वविद्यालय के कुछ निर्माणों को नियमों के विपरीत बताते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ आज़म ख़ान की ओर से कमिश्नर कोर्ट में अपील दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अंतरिम स्टे दिया है।
**अंतिम फैसले तक बनी रहेगी ‘यथास्थिति’**
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कमिश्नर कोर्ट का यह आदेश अंतरिम राहत के रूप में है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष को अपूरणीय क्षति से बचाना है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि ध्वस्तीकरण का आदेश पूरी तरह से निरस्त हो गया है, बल्कि अंतिम फैसला आने तक कार्रवाई पर पूरी तरह रोक रहेगी।
अब अदालत प्रशासन और अपीलकर्ता दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और कानूनी तथ्यों का बारीकी से परीक्षण करेगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि पूर्व में जारी ध्वस्तीकरण का आदेश बरकरार रहेगा, उसमें संशोधन किया जाएगा या फिर उसे पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा।
**भविष्य की सुनवाई पर टिकीं निगाहें**
शिक्षा के उद्देश्य से स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र रहा है। इस संस्थान से जुड़े विभिन्न मामलों में आज़म ख़ान पहले भी कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। ऐसे में कमिश्नर कोर्ट का यह अंतरिम आदेश उनके और विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। फिलहाल कोर्ट के इस रुख के बाद परिसर में शांति और यथास्थिति बनी रहेगी। अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की निगाहें कमिश्नर कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।