शौर्य, शहादत और विरासत को समर्पित ‘महुआ डाबर महोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन 8 जून से; प्रसिद्ध लेखक प्रणव मुखर्जी करेंगे उद्घाटन
📅 Published on: June 6, 2026
सद्दाम खान
**बस्ती (उत्तर प्रदेश)।** भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) की अमर गाथा और देश के गुमनाम शहीदों की स्मृति को जीवंत रखने के लिए बस्ती जनपद के ऐतिहासिक स्थल महुआ डाबर में तीन दिवसीय **”महुआ डाबर महोत्सव-2026″** का आयोजन होने जा रहा है। 8, 9 और 10 जून 2026 तक चलने वाले इस महोत्सव की थीम **”शौर्य, शहादत और विरासत”** तय की गई है।
महुआ डाबर संग्रहालय द्वारा आयोजित इस भव्य महोत्सव का उद्घाटन देश के सुप्रसिद्ध लेखक **प्रणव मुखर्जी** करेंगे। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए प्रचार-प्रसार अभियान से जुड़े अतुल कुमार सिंह, नासिर खान, सुनील पंडित और आदिल खान आदि ने समीक्षा बैठक की है।
## महुआ डाबर: 1857 की क्रांति का वो गौरवशाली इतिहास जिसे अंग्रेजों ने नक्शे से मिटाया
उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के बहादुरपुर विकासखंड में मनोरमा नदी के तट पर स्थित महुआ डाबर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक स्वर्णिम और भावुक अध्याय है।
* **समृद्ध व्यापारिक केंद्र:** आजादी की लड़ाई से पहले महुआ डाबर कपड़ा व्यापार और पीतल उद्योग का एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र हुआ करता था। मनोरमा नदी के रास्ते यहां से बड़े पैमाने पर नौकाओं द्वारा व्यापार होता था। दो मंजिला पक्के मकान और शिक्षित समाज इस कस्बे को आत्मनिर्भर बनाते थे।
* **क्रांति की वो तारीख (10 जून 1857):** फैजाबाद से बिहार जा रहे ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के एक दल को महुआ डाबर के जांबाज क्रांतिकारी जफर अली और उनके साथियों ने मनोरमा नदी पर घेर लिया। इस संघर्ष में लेफ्टिनेंट लिण्डसे और लेफ्टिनेंट थॉमस समेत 6 ब्रिटिश अधिकारी मारे गए।
* **अंग्रेजों का क्रूर प्रतिशोध:** इस घटना से बौखलाए ब्रिटिश शासन ने 3 जुलाई 1857 को पूरे कस्बे को सेना से घेरकर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस नरसंहार में लगभग 5,000 निर्दोष ग्रामीणों, कारीगरों और नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और पूरे कस्बे को फूंक दिया गया।
* **सरकारी दस्तावेजों से मिटाया नाम:** इतिहास के इस काले पन्ने को छुपाने के लिए अंग्रेजों ने मूल महुआ डाबर को राजस्व अभिलेखों में “गैर-चिरागी” (जनशून्य) घोषित कर दिया और इसका नाम सरकारी नक्शों से मिटाकर दूर एक दूसरे गांव को यह नाम दे दिया।
## इतिहास को जीवित करने में संग्रहालय और पुरातत्व विभाग की भूमिका
वर्ष 1999 में स्थापित महुआ डाबर संग्रहालय इस ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का काम कर रहा है। संग्रहालय के महानिदेशक और क्रांतिकारी वंशज **डॉ. शाह आलम राना** के प्रयासों से वर्ष 2010 में लखनऊ विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग (प्रोफेसर अनिल कुमार के निर्देशन) द्वारा यहां उत्खनन कराया गया।
**उत्खनन में मिले प्रमाण:** खुदाई के दौरान प्राचीन कुएं, लखौरी ईंटों की दीवारें, जली हुई लकड़ियां, सिक्के, ढाल, भाले और पुराने भवनों के अवशेष मिले, जिन्होंने अंग्रेजों के इस भीषण नरसंहार की ऐतिहासिक सच्चाई को साबित किया।
वर्तमान में डॉ. राना के प्रयासों के चलते महुआ डाबर को **उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 के “स्वतंत्रता संग्राम सर्किट”** में शामिल किया गया है, जहां पर्यटन विभाग द्वारा 10 एकड़ क्षेत्र में एक भव्य स्मारक विकसित किया जा रहा है।
## महुआ डाबर महोत्सव-2026: मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम विवरण
**स्थान:** क्रांतिस्थल, मनोरमा तट, महुआ डाबर, बहादुरपुर, बस्ती
### प्रथम दिवस: 08 जून 2026 (सोमवार)
* **प्रातः 08:00 बजे:** क्रांतिवीरों को श्रद्धांजलि एवं पुष्पांजलि
* **प्रातः 09:00 बजे:** स्वास्थ्य परीक्षण एवं निःशुल्क दवा वितरण शिविर
* **प्रातः 10:00 बजे:** स्थानीय स्कूली बच्चों द्वारा देशभक्ति सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
* **प्रातः 11:00 बजे:** महुआ डाबर के इतिहास पर विशेष परिचर्चा
* **सायं 04:00 बजे:** विरासत यात्रा (हेरिटेज वॉक)
* **रात्रि 08:00 बजे:** स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित फिल्म एवं वृत्तचित्र (Documentary) का प्रदर्शन
### द्वितीय दिवस: 09 जून 2026 (मंगलवार)
* **प्रातः 10:00 बजे:** स्वतंत्रता संग्राम साहित्य सम्मेलन
* **प्रातः 11:00 बजे:** देश के जाने-माने इतिहासकारों, शोधार्थियों एवं लेखकों का संवाद
* **अपराह्न 03:00 बजे:** ओपन माइक (कविता, गीत, वक्तृत्व एवं लोककला प्रदर्शन)
* **सायं 04:00 बजे:** युवाओं के लिए करियर काउंसलिंग सत्र
* **सायं 05:30 बजे:** अमर शहीदों की याद में मशाल सलामी
* **रात्रि 08:00 बजे:** शहीदों की झांकी एवं नाट्य मंचन
### तृतीय दिवस: 10 जून 2026 (बुधवार) – शहादत दिवस
* **प्रातः 08:00 बजे:** सशस्त्र पुलिस गारद द्वारा शहीदों को ‘शस्त्र सलामी’
* **प्रातः 09:00 बजे:** महुआ डाबर संग्रहालय का भ्रमण
* **प्रातः 10:00 बजे:** विरासत संरक्षण संकल्प सभा
* **सायं 04:00 बजे:** उत्कृष्ट प्रतिभाओं एवं सहयोगियों का सम्मान समारोह
* **सायं 05:00 बजे:** सांस्कृतिक संध्या एवं लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां
* **सायं 06:00 बजे:** राष्ट्रगान एवं सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ महोत्सव का भव्य समापन
यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि देश की नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास, देशप्रेम और पूर्वजों के बलिदान की परंपरा से जोड़ने का एक जीवंत माध्यम है।


