गुरुजी की कलम से: दो महीने बाद खुली राहत की राह, भारत को फिर शुरू हुआ नेपाली चाय का निर्यात

गुरु जी की कलम से
**काठमांडू ** लगभग दो महीने से गंभीर निर्यात संकट झेल रहे नेपाल के चाय उद्योग के लिए आखिरकार एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। भारत को नेपाली चाय का निर्यात दोबारा शुरू हो गया है। ताजा अपडेट के अनुसार, कांकड़भिट्टा सीमा से चाय से लदे कई ट्रकों को भारत के पानीटंकी बॉर्डर के लिए रवाना कर दिया गया है। हालांकि, भारतीय कस्टम से अंतिम क्लियरेंस मिलना अभी बाकी है, लेकिन नेपाल सरकार की सक्रिय पहल और दोनों देशों के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद अब हालात पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।
नियम बदले: अब 100% के बजाय सिर्फ 20% रैंडम जांच
नेपाल चाय उत्पादक संघ के अध्यक्ष **आदित्य पराजुली** ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि इससे पहले भारत द्वारा हर खेप (कंसाइनमेंट) की 100 प्रतिशत कड़ाई से जांच की जा रही थी। इस प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण चाय का निर्यात लगभग पूरी तरह ठप हो गया था।
अब दोनों देशों के बीच बनी सहमति के बाद भारत ने नियमों में ढील दी है। नए नियम के तहत अब केवल **20 प्रतिशत खेपों की रैंडम जांच** की जाएगी। भारत सरकार के इस फैसले से नेपाल के चाय निर्यातकों और पूरे उद्योग ने बड़ी राहत की सांस ली है।
गोदामों में फंसी थी 13 लाख किलो चाय, संकट में थे हजारों मजदूर
निर्यात पर अचानक ब्रेक लगने के कारण नेपाल के चाय उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था:
* **स्टॉक का संकट:** गोदामों में 13 लाख किलोग्राम से अधिक नेपाली चाय डंप हो गई थी।
* **उद्योगों पर ताला:** निर्यात ठप होने के विरोध में झापा और इलाम जिलों के करीब 99 चाय उद्योग पूरी तरह बंद हो गए थे।
* **रोजगार पर लात:** फैक्ट्रियां बंद होने से हजारों श्रमिकों के सामने अचानक रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया था।
उम्मीदों की नई सुबह
निर्यात दोबारा शुरू होने की खबर मिलते ही बंद पड़े चाय उद्योगों में एक बार फिर से रौनक लौट आई है और मशीनें घूमने लगी हैं। यदि भारतीय कस्टम पर क्लियरेंस की प्रक्रिया पूरी तरह सुचारु रूप से चलती रही, तो नेपाली चाय का निर्यात जल्द ही अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ लेगा।
यह केवल दो देशों के बीच व्यापार की बहाली नहीं है, बल्कि नेपाल के चाय उद्योग, स्थानीय किसानों और दिन-रात मेहनत करने वाले हजारों श्रमिक परिवारों के लिए एक नई उम्मीद और बड़ी आर्थिक संजीवनी है।