सिद्धार्थ नगर : सास और ननद को बहू ने घर से निकाला, पेट्रोल की बोतल लेकर कलक्ट्रेट पहुंचीं मां-बेटी

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सिद्धार्थनगर। घरेलू कलह और अपनों की बेरुखी से तंग आकर न्याय की आस खो चुकीं मां-बेटी शुक्रवार को कलक्ट्रेट परिसर में आत्मदाह की नीयत से पहुंच गईं। व्हीलचेयर पर बैठी दिव्यांग मां और हाथ में पेट्रोल की बोतल लिए बेटी को देख कलक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद एलआईयू (Local Intelligence Unit) कर्मी ने तत्परता दिखाते हुए बोतल छीन ली और एक बड़ा हादसा होने से टल गया।

क्या है पूरा मामला? शहर के सिविल लाइन वार्ड की रहने वाली शैलजा (पुत्री स्व. राम करन गुप्ता) अपनी दिव्यांग मां प्रभावती देवी के साथ न्याय की गुहार लगाने पहुंची थीं। शैलजा ने बताया कि उनके पिता पुलिस विभाग में कर्मचारी थे, जिनकी सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई थी। सबकी सहमति से उनके मझले भाई बृजेश को मृतक आश्रित कोटे से नौकरी मिली। परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब दो भाइयों के बाद 2025 में बृजेश की भी मृत्यु हो गई।

भाभी पर लगाए गंभीर आरोप शैलजा का आरोप है कि भाई की मौत के बाद मिली आर्थिक सहायता राशि भाभी कमला गुप्ता को मिली। इसके बाद भाभी ने दिव्यांग सास और ननद को घर से बाहर निकाल दिया और जान से मारने की धमकी देने लगीं। आरोप यह भी है कि भाभी पूरा घर बेचकर दूसरी शादी करना चाहती हैं और मृतक भाई की जगह खुद नौकरी पाना चाहती हैं। पीड़िता के अनुसार, कई बार पुलिस और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे मजबूर होकर उन्हें यह खौफनाक कदम उठाना पड़ा।

मौके पर मची अफरा-तफरी, एसडीएम ने दिया आश्वासन घटना के दौरान कलक्ट्रेट में मौजूद एलआईयू कर्मी अमित राय ने मुस्तैदी दिखाते हुए शैलजा के हाथ से पेट्रोल की बोतल छीनी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एसडीएम सदर रेनू मिश्रा मौके पर पहुंचे। शैलजा ने मांग की है कि उसके भतीजे को मृतक आश्रित के तहत नौकरी दी जाए और उसे व उसकी मां को उनके घर में रहने का अधिकार दिलाया जाए।

एसडीएम सदर रेनू मिश्रा ने पीड़िता की समस्याएं सुनीं और उन्हें निष्पक्ष न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही, भविष्य में इस तरह का आत्मघाती कदम न उठाने की सख्त हिदायत दी।