मूसलाधार बारिश में भी कागजों पर दौड़ी कुदाल: सिद्धार्थनगर में मनरेगा की फर्जी ऑनलाइन हाजिरी का खेल, जिम्मेदार मौन!

कपिलवस्तु पोस्ट,सिद्धार्थनगर।

जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच मनरेगा (MNREGA) में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। जब बारिश के कारण धरातल और कार्यस्थलों पर काम पूरी तरह ठप था, तब ऑनलाइन पोर्टल पर 1,286 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर दी गई। इस पूरे खेल से जहां एक ही दिन में लाखों रुपये के सरकारी धन के बंदरबांट की साजिश की बू आ रही है, वहीं इस पर निगरानी रखने वाले प्रशासनिक अधिकारियों और जिम्मेदार तंत्र की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बारिश में काम ठप, फिर भी पोर्टल पर चमकी हाजिरी

जिले के बढ़नी, शोहरतगढ़, जोगिया, डुमरियागंज, इटवा, भनवापुर, नौगढ़, खेसरहा, बर्डपुर, लोटन, खुनियांव और मिठवल समेत सभी 12 विकासखंडों में रिमझिम से लेकर तेज बारिश का दौर जारी रहा। इसके बावजूद मनरेगा पोर्टल पर कुल 1,286 मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई। यदि औसतन एक मजदूर की दिहाड़ी लगभग ₹300 मानी जाए, तो केवल एक दिन में करीब ₹3,85,800 के सरकारी बजट की चपत लगाने की तैयारी कर ली गई।

अधिकारियों की आंख पर पट्टी, कौन है ‘मास्टरमाइंड’?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मौके पर बारिश के चलते कार्य प्रभावित था, तो इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कैसे हो गई?

  • क्या जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करने की जहमत उठाई?

  • क्या केवल कमरों में बैठकर कागजी हाजिरी के आधार पर ही सरकारी धन का भुगतान पास किया जा रहा है?

  • इस फर्जीवाड़े का असली ‘मास्टरमाइंड’ कौन है और क्या इसमें निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक की मिलीभगत है?

जिले में हाजिरी की निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों का ध्यान आखिर इस तरफ क्यों नहीं गया?

जांच का रटा-रटाया राग

मामले को लेकर जब डीसी मनरेगा (DC MNREGA) से बात की गई तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब देते हुए कहा कि “मामले की जांच कराई जा रही है”। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह जांच केवल फाइलों में दबकर रह जाएगी या फिर बारिश में फर्जी हाजिरी दर्ज करने वाले दोषियों, जियो-टैग फोटो का मिलान कराने वालों और मस्टर रोल का फर्जीवाड़ा करने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी?

स्थानीय लोगों की मांग है कि बारिश वाले दिनों में दर्ज हुई हाजिरी, जियो-टैग फोटो और मस्टर रोल की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। अब देखना यह होगा कि जिले के उच्चाधिकारी इस फर्जीवाड़े का कड़ा संज्ञान लेकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजते हैं या यह खेल यूं ही अधिकारियों की सरपरस्ती में चलता रहेगा।