📅 Published on: October 16, 2026
डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने सौंपी अपनी कुर्सी, पुष्पगुच्छ देकर किया स्वागत
एक दिन की डीएम ने जमीन विवाद के मामले में एसडीएम को दिए जांच के निर्देश; कहा- सिविल सर्विसेज में जाना ही लक्ष्य
कपिलवस्तुपोस्ट ,सिद्धार्थनगर:
प्रदेश भर में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए चलाए जा रहे ‘मिशन शक्ति फेज-6’ के तहत सिद्धार्थनगर जिले में एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। शुक्रवार को रघुवर प्रसाद जायसवाल सरस्वती शिशु विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की 11वीं कक्षा की मेधावी छात्रा श्रद्धा पांडेय को सांकेतिक रूप से एक दिन का जिलाधिकारी (DM) बनाया गया।
कलेक्ट्रेट पहुंचने पर भव्य स्वागत, सौंपी गई कमान
सुबह जब श्रद्धा पांडेय कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचीं, तो वहां पहले से मौजूद जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद जिलाधिकारी ने सम्मानपूर्वक अपनी कुर्सी श्रद्धा पांडेय को सौंपी और उनसे फरियादियों की समस्याएं सुनकर उनका त्वरित निस्तारण करने का आग्रह किया।
एक दिन की डीएम बनीं श्रद्धा पांडेय ने पूरी गंभीरता और कुशलता के साथ जनता के बीच पहुंचकर जनसुनवाई की तथा कई मामलों पर संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जमीन विवाद का मामला निपटाया, सिविल सर्विसेज में जाने की इच्छा
मीडिया से बातचीत करते हुए श्रद्धा पांडेय ने कहा कि एक दिन का जिलाधिकारी बनना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई के दौरान उनके सामने एक जमीन विवाद का मामला आया था, जिस पर उन्होंने तत्काल संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को मौके की जांच कर निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। श्रद्धा ने अपना सपना साझा करते हुए कहा कि वह भविष्य में प्रशासनिक सेवा (Civil Services) में जाना चाहती हैं ताकि गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों की सेवा कर सकें।
छात्राओं का मनोबल बढ़ाना और सशक्तिकरण ही उद्देश्य: डीएम
मामले में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने बताया कि मिशन शक्ति का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं को सशक्त व स्वावलंबी बनाना है। इसी दिशा में छात्रा को एक दिन का जिलाधिकारी बनाकर कमान सौंपी गई। उन्होंने कहा कि आगे भी अन्य विभागों में भी इसी तरह छात्राओं को सांकेतिक जिम्मेदारी सौंपी जाएगी ताकि उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़े, जिससे महिला सशक्तिकरण का सपना साकार हो सके।