महिषासुर का वध ही नहीं, पढ़ाई का संकल्प भी! सिद्धार्थनगर के स्कूल में माँ दुर्गा के रूप ने दिया शिक्षा और करुणा का अनूठा संदेश

प्राथमिक विद्यालय नारायणपुर में नवरात्रि पर अनोखी पहल: ‘राक्षसों’ को बिस्कुट खिलाकर दिलाई अच्छे संस्कार और शिक्षा ग्रहण करने की शपथ

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शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। नवरात्रि का पर्व आमतौर पर शक्ति साधना और असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ ब्लॉक अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय नारायणपुर में इस बार नवरात्रि का एक अलग ही रंग देखने को मिला। यहाँ बच्चों द्वारा प्रस्तुत एक नाटक में माँ दुर्गा का रूप धारण किए नन्ही छात्रा ने ‘असुरों’ को पराजित करने के बाद उन्हें डराने या दंडित करने के बजाय बिस्कुट खिलाया और प्रेम से पढ़ाई करने का वचन लिया।

धार्मिक आस्था को शिक्षा, करुणा और सामाजिक सरोकार से जोड़ती इस अनूठी प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों और ग्रामीणों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

कुरीतियों के अंधकार को शिक्षा की रोशनी से मिटाने की पहल

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका रश्मि शर्मा के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस सांस्कृतिक मंचन के जरिए समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों पर सीधा प्रहार किया गया। बच्चों ने अपने अभिनय के माध्यम से दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, अशिक्षा, महिला उत्पीड़न और बेरोजगारी जैसी विकराल समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक किया।

कार्यक्रम का मूल संदेश यह था कि आज के आधुनिक समाज में किसी भी बुराई या अन्याय से निपटने का सबसे सशक्त माध्यम हथियार नहीं, बल्कि शिक्षा, नैतिक मूल्य और सकारात्मक सोच है।

ममता और संस्कार का दिखा अद्भुत संगम

नाटकीय मंचन के दौरान वह क्षण सबसे खास रहा जब असुरों का संहार करने वाली माँ दुर्गा के स्वरूप ने पराजित बच्चों के प्रति वात्सल्य और करुणा का भाव प्रकट किया। उन्हें बिस्कुट देकर अच्छी शिक्षा प्राप्त करने और सही मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाया गया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि किसी भटके हुए व्यक्ति को सही दिशा में लाने के लिए दंड से अधिक असरदार प्रेम, शिक्षा और सही संस्कार होते हैं।

प्रभारी प्रधानाध्यापिका रश्मि शर्मा की इस नवाचारपूर्ण पहल की सर्वत्र सराहना हो रही है। उनका मानना है कि विद्यालयों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर बच्चों को एक सजग और नैतिक नागरिक बनाने का केंद्र होना चाहिए।

इन छात्र-छात्राओं और स्टाफ का रहा सराहनीय योगदान

इस सफल आयोजन में शिक्षामित्र रामधनी व अमता गौतम तथा रसोइया भारतभुवाल व जलधारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, मंच पर अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरने वाले नन्हे कलाकारों में रिया, श्रद्धा, मीनाक्षी, आदित्य कुमार गौतम, आदित्य कुमार, विवेक, पंकज, दीपक, सुनैना, नैना, मुस्कान, संजना, अरुण, सुषांत और अंशिका शामिल रहे।

आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब हर बच्चे तक कलम और किताब पहुंचे, बेटियों को सुरक्षित वातावरण मिले और कुरीतियों का पूर्णतः उन्मूलन हो।