📅 Published on: August 15, 2023
kapilvastupost reorter
सिद्धार्थनगर। राजकीय बौद्ध संग्रहालय पिपरहवा सिद्धार्थनगर द्वारा दिनांक सोमवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विभाजन पीडितों की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं मौन सभा का आयोजन किया गया।14 अगस्त 1947 का दिन भारत के लिए इतिहास का एक गहरा जख्म है जो आज तक ताजा है और भरा नहीं है।
यह वो तारीख है, जब देश का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान एक अलग देश बना। बंटवारे की शर्त पर ही भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली।दोनों देशों के बीच बंटवारे की लकीर खिंचते ही रातों-रात अपने ही देश में लाखों लोग बेगाने और बेघर हो गए। धर्म-मजहब के आधार पर न चाहते हुए भी लाखों लोग इस पार से उस पार जाने को मजबूर हुए।
इस अदला-बदली में दंगे भड़के, कत्लेआम हुए।जो लोग बच गए, उनमें लाखों लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई और भारत-पाक विभाजन की यह घटना सदी की सबसे बड़ी त्रासदी में बदल गई। यह केवल किसी देश की भौगोलिक सीमा का बंटवारा नहीं बल्कि लोगों के दिलों और भावनाओं का भी बंटवारा था। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस इसी दर्द को याद करने का दिन है।
इसके साथ ही संग्रहालय में आजादी के अमृत महोत्सव के समापन समारोह “मेरी माटी मेरा देश” अभियान के अंतर्गत “वीरों का वंदन” कार्यक्रम सम्पन्न हुआ जिसमे देश की सेवा में अपने अभूतपूर्व योगदान देने वाले भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया गया और संग्रहालय परिसर में इनके द्वारा वृक्षारोपण भी कराया गया।