📅 Published on: December 24, 2024
गुरु जी की कलम से
नगर पंचायत बढ़नी में एक पर कार्यक्रम में गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों बाबा वीर जोरावर सिंह और बाबा वीर फतेह सिंह के बलिदानों को याद किया गया | इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरिभजन सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहेब जी सिख धर्म के नौवें गुरु है।
24 नवम्बर को गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस हैं और इस दिन राष्ट्रीय शहीदी दिवस भी होता है। गुरु तेग बहादुर सिंह जी अपनी समता, करुणा, निष्ठा, प्रेम, सहानुभूति, त्याग और बलिदान जैसे विशेष गुणों के लिए जाने जाते हैं।
गुरु तेग बहादुर सिंह जी को हिन्द की चादर भी कहा जाता है। गुरु तेग बहादुर सिंह को सिख धर्म में क्रांतिकारी युग पुरुष के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म पंजाब के अमृतसर में वैशाख कृष्ण पंचमी तिथि को हुआ था। वे गुरु हर गोविन्द सिंह जी के 5वें पुत्र थे।
गुरु तेग बहादुर सिंह जी बचपन में त्यागमल नाम से पहचाने जाते थे, उनकी शिक्षा-दीक्षा मीरी-पीरी के मालिक गुरु-पिता गुरु हरि गोविन्द साहब की छत्र छाया में हुई थी |
14 वर्ष की उम्र में ही अपने पिता के साथ उन्होंने कंधे से कन्धा मिलाकर मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में अपना साहस दिखाकर वीरता का परिचय दिय इसी वीरता से प्रभावित होकर गुरु हर गोविन्द सिंह जी ने उनका नाम तेग बहादुर यानी तलवार के धनी रख दिया। इसी समयावधि में उन्होंने गुरुबाणी, धर्मग्रंथों के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्र और घुड़सवारी आदि की शिक्षा प्राप्त कर लिया |
सिखों के 8वें गुरु हरिकृष्ण राय जी की अकाल मृत्यु के बाद गुरु तेग बहादुर जी को नौवां गुरु बनाया गया था। गुरु तेग बहादुर सिंह ने आदर्श, धर्म, मानवीय मूल्य तथा सिद्धान्तों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। वे एक बहादुर, निर्भीक, विचारवान और उदार चित्त वाले