मृत घोषित कर हड़पी जमीन, प्रशासनिक लापरवाही उजागर

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर। जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। तहसील क्षेत्र के सिरसिया मिश्र निवासी रामललन को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाकर उनकी जमीन उनके ही पिता तोखाई के नाम कर दी गई। इस चौंकाने वाली धांधली का खुलासा तब हुआ जब रामललन ने चिल्हिया थाना समाधान दिवस में जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. और पुलिस अधीक्षक अभिषेक महाजन के सामने अपनी शिकायत रखी।

प्रशासन की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा?

रामललन का आरोप है कि ब्लॉक और तहसील के कर्मचारियों की मिलीभगत से उन्हें मृत घोषित कर उनकी जमीन उनके पिता के नाम कर दी गई। उन्होंने बताया कि उनके पास सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन प्रशासनिक तंत्र ने बिना सत्यापन किए ही उनकी जमीन को हड़पने का खेल खेला। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मुंबई में रहकर रोजी-रोटी कमा रहे थे, लेकिन इसी बीच उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर यह फर्जीवाड़ा किया गया।

डीएम-एसपी ने दिए कार्रवाई के आदेश, लेकिन क्या होगा न्याय?

डीएम डॉ. राजा गणपति आर. ने मामले की जांच का आदेश दिया है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, एसडीएम राहुल सिंह का कहना है कि यह मामला तहसीलदार के न्यायालय में आदेश के आधार पर हुआ है, इसलिए पीड़ित को वहीं अपील करनी होगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन की इस गलती का खामियाजा रामललन को भुगतना पड़ेगा?

वरासत में गड़बड़ी पर कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं?

लोटन में हुए समाधान दिवस में भी जमीनी विवादों के कई मामले सामने आए, लेकिन एक भी निस्तारण नहीं हो पाया। सवाल यह है कि जब डीएम और एसपी खुद समाधान दिवस में मौजूद थे, तब भी फरियादियों को सिर्फ आश्वासन ही क्यों मिला? प्रशासन आए दिन वरासत, बंटवारे और भूमि विवादों को लेकर दावे करता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि तहसीलों और ब्लॉक में बिना रिश्वत या सिफारिश के कुछ भी संभव नहीं।

प्रशासनिक तंत्र कब सुधरेगा?

यह पहली बार नहीं है जब सिद्धार्थनगर में इस तरह का मामला सामने आया है। जिले में प्रशासन की अनदेखी के चलते कई गरीबों और असहाय लोगों की जमीनें हड़पी जा चुकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले में दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

जब तक प्रशासन भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं करेगा और पारदर्शी जांच प्रक्रिया लागू नहीं होगी, तब तक आम जनता को न्याय मिलना मुश्किल ही रहेगा।