# मौत का ‘अस्पताल’ या फर्जीवाड़े का खेल? जनता सेवा हॉस्पिटल में नवजात की मौत के बाद खड़े हुए 5 सबसे बड़े सवाल

गुरु जी की कलम से
इटवा, सिद्धार्थ नगर
कस्बे के **जनता सेवा अस्पताल** में सीजर ऑपरेशन के बाद एक बेगुनाह नवजात की मौत ने न सिर्फ अस्पताल की संवेदनहीनता को उजागर किया है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य महकमे की साख पर बट्टा लगा दिया है। यह मामला अब सिर्फ एक चिकित्सकीय लापरवाही भर नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ और एक बड़े संगठित फर्जीवाड़े की तरफ इशारा कर रहा है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, अस्पताल के पंजीकरण, संचालन व्यवस्था और ऑपरेशन थिएटर (OT) के भीतर के स्याह कारनामे खुलकर सामने आ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई कड़े सवाल दाग दिए हैं।
बड़ा सवाल: अगर महिला सर्जन नहीं थीं, तो पेट पर छुरी किसने चलाई?
डुमरियागंज तहसील के सहदेइया गांव निवासी वंदना (पत्नी चंद्रमणि) का 23 मई की शाम सीजर ऑपरेशन किया गया था। इस मामले में नया मोड़ तब आया जब 30 मई को सर्जन **डॉ. डाली शर्मा** ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर अपना लिखित बयान दर्ज कराया। लेकिन इस बयान ने राहत देने के बजाय मामले को और ज्यादा संदिग्ध बना दिया है।
पीड़ित परिवार का दावा है कि ऑपरेशन के वक्त डॉ. डाली शर्मा अस्पताल में मौजूद ही नहीं थीं। परिजनों का सीधा और बेहद गंभीर आरोप है कि **ऑपरेशन थिएटर के भीतर एक पुरुष सक्रिय था और वही सर्जन की भूमिका निभा रहा था।**
आखिर वह ‘रहस्यमयी पुरुष’ कौन था जिसे मरीजों की जिंदगी से खेलने की छूट दी गई? क्या अस्पताल प्रबंधन खुद को बचाने के लिए अब एक डिग्रीधारी डॉक्टर का मुखौटा इस्तेमाल कर रहा है?
कागजों पर ‘डॉक्टर साहब’, हकीकत में कहीं और ड्यूटी!
अस्पताल की पंजीकरण व्यवस्था पर भी अब उंगलियां उठने लगी हैं। चर्चा है कि जिन नामचीन डॉक्टरों और विशेषज्ञों के दस्तावेजों के दम पर इस अस्पताल का पंजीकरण कराया गया, वे असल में यहाँ आते ही नहीं हैं, बल्कि कहीं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सवालों के घेरे में ओटी टेक्नीशियन:** ऑपरेशन थिएटर में तैनात ओटी टेक्नीशियन की योग्यता और पहचान भी पूरी तरह संदिग्ध है। क्या वह सच में योग्य है या किसी अनाड़ी के हाथ में मरीजों को बेहोश करने और औजार थमाने का जिम्मा सौंप दिया गया है?
सीसीटीवी फुटेज से डरा अस्पताल प्रबंधन?
पीड़ित परिवार ने अब आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। उन्होंने जांच समिति से मांग की है कि अस्पताल का **सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage)** तत्काल जब्त कर सुरक्षित किया जाए।
**प्रशासन से सवाल:** आखिर फुटेज खंगालने में देरी क्यों की जा रही है? क्या अस्पताल के रसूखदार मालिक को सबूत मिटाने का मौका दिया जा रहा है, या फिर स्वास्थ्य विभाग खुद किसी बड़े राज के खुलने से डर रहा है?
जांच अधिकारी का दावा: “होगी निष्पक्ष कार्रवाई”
इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जांच अधिकारी ने मामले की हर परत को खोलने का भरोसा दिया है।
“नवजात बच्चे की मौत के मामले में हर एक बिंदु को शामिल किया गया है। हर पहलू पर हमारी पैनी निगाह बनी हुई है ताकि पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय मिल सके। परिवार के पास जो भी साक्ष्य हैं, वे हमें उपलब्ध कराएं। जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो रही है और दोषी बचने नहीं पाएंगे।”
**डॉ. आरजी सिंह**, जांच अधिकारी / एसीएमओ आरसीएच