सिद्धार्थनगर: ढेबरुआ में खनन माफियाओं का आतंक, बिना नंबर के डंपर तोड़ रहे सड़कें; प्रशासन नतमस्तक

**जेसीबी से दिन-रात हो रहा अवैध मिट्टी का खनन, सरकार को लग रहा लाखों के राजस्व का चूना।**
* **बिना नंबर प्लेट वाले डंपरों की रफ्तार से राहगीरों की जान आफत में, सड़कें हो रहीं जमींदोज।**
**गरीब किसानों को चंद पैसों का लालच देकर कौड़ियों के भाव खरीदी जा रही मिट्टी।**
* **शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौन, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति।**

गुरु जी की कलम से
**बढ़नी / सिद्धार्थ नगर।**
जनपद के ढेबरुआ थाना क्षेत्र में इन दिनों खनन माफियाओं का आतंक चरम पर है। क्षेत्र में कई जगहों पर दिन-रात बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों से अवैध मिट्टी खनन का काला कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही और कथित संलिप्तता के कारण इन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि स्थानीय प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक नजर आ रहा है।
**बिना नंबर के डंपर बन रहे काल, रेलवे अंडरब्रिज को पहुंचाया नुकसान**
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खनन माफिया पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने (या मिलीभगत के चलते) पीछे की तरफ बिना नंबर प्लेट वाली डंफर गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन भारी-भरकम वाहनों के अनियंत्रित परिचालन से क्षेत्र की सार्वजनिक सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आए दिन राहगीरों की जान जोखिम में रहती है। बिना नंबर की गाड़ियों के कारण किसी दुर्घटना की स्थिति में पहचान कर पाना भी नामुमकिन हो जाता है।
**ग्रामीणों में आक्रोश:** अभी कुछ दिनों पहले ही घरुआर गांव के पास स्थित रेलवे अंडरब्रिज का फाउंडेशन एक डंपर चालक की लापरवाही से टूट गया था। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसकी शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
**किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे माफिया**
क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि खनन माफिया स्थानीय गरीब किसानों को चंद रुपयों का लालच देकर उनकी उपजाऊ मिट्टी को कौड़ियों के भाव खरीद रहे हैं। इसके बाद इसी मिट्टी को ईंट भट्टों और बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचकर चांदी काट रहे हैं। रात के अंधेरे में चलने वाले इस खेल से एक तरफ जहां सरकार के राजस्व को भारी चूना लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण और कृषि भूमि को भी अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।
**मीडिया के सवालों से भाग रहे जिम्मेदार अधिकारी**
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले पर जब खनन अधिकारी से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की जाती है, तो उनका फोन रिसीव नहीं होता। वहीं, राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी मीडिया के तीखे सवालों से बचते नजर आ रहे हैं और कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन कभी-कभार ‘हाथी के दांत दिखाने के और खाने के और’ वाली तर्ज पर दिखावे की कार्रवाई कर कोरम पूरा कर लेता है। इसी लचर रवैये के कारण ढेबरुआ क्षेत्र में खनन माफियाओं का राज चल रहा है और आम जनता खुद को असहाय महसूस कर रही है।