इलाहाबाद हाईकोर्ट का ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की जांच वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार; कहा- ‘पहले कर्नाटक हाईकोर्ट जाएं’

गुरु जी की कलम से
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की गतिविधियों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
अदालत ने अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित राज्य के हाईकोर्ट में जाने की सलाह दी है।
## ⚖️ ‘फोरम नॉन कन्वीनियंस’ के तहत याचिका खारिज
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि यह याचिका इस अदालत के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है।
* **स्थानीय संबंध का अभाव:** अदालत ने पाया कि इस पूरे मामले का उत्तर प्रदेश से कोई प्रत्यक्ष या विशेष संबंध नहीं है।
* **याचिकाकर्ता का मूल निवास:** याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर कर्नाटक के बेंगलुरु के स्थायी निवासी हैं।
* **अदालत की टिप्पणी:** पीठ ने **”फोरम नॉन कन्वीनियंस”** (Forum non-conveniens) के सिद्धांत का पालन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए था।
अदालत ने कहा:
> “याचिकाकर्ता बेंगलुरु का निवासी है। यदि वह ऐसा चाहता है तो उसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। वर्तमान याचिका में हमें उत्तर प्रदेश से संबंधित कोई विशेष तथ्य नहीं मिलता, इसलिए यह याचिका इस अदालत में सुनवाई योग्य नहीं है।”
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## 🛑 लखनऊ का पता बताने की दलील अमान्य
याचिकाकर्ता ने अदालत में तर्क दिया कि उन्होंने इस मामले से जुड़ी कुछ शिकायतें लखनऊ के एक पते से भेजी थीं। हालांकि, खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने याद दिलाया कि इससे पहले एक सुरक्षा संबंधी मामले में खुद याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया था कि वह बेंगलुरु के निवासी हैं और उसी आधार पर राहत मांगी थी।
जब कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र की कमी के कारण याचिका को अस्वीकार्य करने का संकेत दिया, तो याचिकाकर्ता ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने याचिकाकर्ता को सक्षम अधिकार क्षेत्र वाली अदालत (कर्नाटक हाईकोर्ट) में नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता देते हुए वर्तमान याचिका को वापस लेने की मंजूरी दे दी।
## 🔍 क्या थे याचिका में गंभीर आरोप?
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और उसके संस्थापक पर कई गंभीर आरोप लगाए थे:
* **विदेशी और डार्क वेब फंडिंग:** याचिका में दावा किया गया कि यह एक अपंजीकृत राजनीतिक इकाई है, जिसे विदेशी ताकतों और कथित तौर पर गहरे तंत्र (Dark Web) से फंड मिल रहा है।
* **देश विरोधी गतिविधियां:** आरोप लगाया गया कि भारत विरोधी तत्वों ने देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के लिए इसे खड़ा किया है।
* **युवाओं को भड़काने का डिजिटल अभियान:** इसे एक सुनियोजित डिजिटल अभियान बताया गया, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को प्रभावित करना, सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाना और भारत सरकार के प्रति असंतोष पैदा करना है।
* **सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की मांग:** याचिका में फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल और एक्स (Twitter) पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े सभी अकाउंट्स, पेजेज़ और चैनलों को स्थायी रूप से ब्लॉक करने की मांग की गई थी।