📅 Published on: July 13, 2026
गुरु जी की कलम से
**सिद्धार्थनगर ।** उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ वर्ष 1992 में हुई शिक्षक भर्ती से जुड़ी मूल नियुक्ति पत्रावली (ओरिजिनल फाइल्स) सरकारी दफ्तरों से रहस्यमय तरीके से गायब हो गई हैं। एक शिकायत की जांच के दौरान जब बेसिक शिक्षा विभाग को 34 साल पुराने इन रिकॉर्ड्स की जरूरत पड़ी, तो विभाग के हाथ-पांव फूल गए। न तो यह महत्वपूर्ण फाइल बीएसए (BSA) कार्यालय में मिली और न ही डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) बांसी में उपलब्ध है।
अब विभाग के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर सरकारी भर्ती का इतना महत्वपूर्ण रिकॉर्ड कहाँ और कैसे गायब हो गया।
**फर्जी शिक्षकों पर पर्दा डालने की कोशिश या कोई बड़ी साजिश?**
यह मामला सिर्फ फाइलों के गुम होने तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि सिद्धार्थनगर जिले में पिछले कुछ समय में सैकड़ों की संख्या में फर्जी शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई हो चुकी है और उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) भी दर्ज कराई गई है। ऐसे में ऐन वक्त पर 1992 की भर्ती से जुड़ी मूल फाइलों का गायब हो जाना किसी बड़े भ्रष्टाचार और गहरी साजिश की तरफ इशारा कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि फर्जी शिक्षकों के रैकेट से जुड़े मामले पर पर्दा डालने और दोषियों को बचाने के लिए जानबूझकर इन दस्तावेजों को खुर्द-बुर्द किया गया है।
**कितने शिक्षकों की हुई थी नियुक्ति? विभाग के पास कोई आंकड़ा नहीं**
मूल रिकॉर्ड न मिलने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग अब यह भी बताने की स्थिति में नहीं है कि वर्ष 1992 की उस भर्ती में जिले में कुल कितने शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। नियुक्त शिक्षकों की सटीक संख्या और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) भी फिलहाल पूरी तरह ठप हो गया है।
इस भर्ती को बीते 34 साल हो चुके हैं और इसमें नियुक्त कई शिक्षक अब सेवानिवृत्त (Retire) भी हो चुके हैं। इसके बावजूद विभाग के पास कोई प्रामाणिक रिकॉर्ड न होना सरकारी कार्यप्रणाली और संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
**आखिर कहाँ गईं फाइलें? अनुत्तरित हैं कई सवाल**
अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि भर्ती की यह मूल पत्रावली अंतिम बार किस कार्यालय में रखी थी? क्या यह रिकॉर्ड कभी बीएसए कार्यालय से डायट भेजा गया था, या डायट से किसी अन्य कार्यालय में स्थानांतरित हुआ था? यदि ऐसा हुआ, तो इसका रिसीविंग रिकॉर्ड कहाँ है? फिलहाल इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है।
बीएसए ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर जिले के **बीएसए शैलेश कुमार** ने बताया, *”वर्ष 1992 में नियुक्त शिक्षकों की मूल पत्रावली बीएसए कार्यालय में नहीं मिलने पर डायट को पत्र भेजा गया था। हालांकि, वहां से भी पत्रावली उपलब्ध न होने की सूचना प्राप्त हुई है। यह एक गंभीर विषय है और संबंधित रिकॉर्ड की तलाश के लिए हर स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।”*
दस्तावेजों के गायब होने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में फाइलों की तलाश हो पाती है या फिर रिकॉर्ड गायब करने वाले दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाता है।