कुरआन-ए-पाक की शिक्षा से हिदायत और आख़िरत मे निजात का शबब हासिल होती है – मौलाना अब्दुल हमीद अशरफ

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बरोजे जुमा साप्ताह का एक पर्व के रूप मे
महत्त्वपूर्ण होता है

नमाज सभी इबादतों से अहम है साथ ही साथ मुस्लिम और गैर मुस्लिम मे सिर्फ एक ही अंतर है वो है नमाज
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जाकिर खान

सिद्धार्थनगर । कुरान इस्लाम का केंद्रीय धार्मिक पाठ है । जिसे मुसलमान ईश्वर , अरबीमे मे الله अल्लाह का रहस्योद्घाटन मानते हैं । घर ,समाज , कबीला जिला जवार और देश और मुल्क मे शांति और आमन चाहते हैं तो पवित्र किताब कुरान-ए- पाक की शिक्षा लेनी पड़ेगी । क्योंकि कि कुरान-ए- पाक की तिलावत से हिदायत मिलती है । यही नही कुरान-ए- पाक दस्तूरे -ए – व कानूने इलाही है । जीवन मे खुशहाली और अनुशान लाना है तो कुरान-ए-पाक का अध्ययन करना होगा ।/कुरान के पढ़ने और उसके बताये हुए फरमान के मुताबिक अल्लाह का खौफ पैदा होता है । कुरान की तालीम से दुनिया मे तरक्की और आख़िरत मे निजात का शबब हासिल होता है ।
उक्त बाते यौमे जुमा के मौके पर थाना उसका बाजार क्षेत्र अंतर्गत ग्रामा पंचायत सोहास शुमाली के टोला शिशहनिया के जामा मस्जिद मे युवा मुस्लिम विद्वान व आलिम मौलाना अब्दुल हमीद अशरफ ने
जुमा की खुतबा के दौरान लोगो को खेताब करते हुए कहा ।
उन्होंने कहा कि जुमा का दिन बहुत ही अहम है । नमाज सभी इबादतों से अहम है ।
दूसरे शब्दों मे कहे तो सभी इबादत की जान होती है नमाज । कुरआन पाक के स्टडी से दुनिया और आख़िरत दोनो मे कामयाबी निश्चित है । अन्य किसी इल्म के ग्रहण करते है तो उसमे आख़िरत का गारंटी नही । जबकी कुरान के शिक्षा ग्रहन से आख़िरत का शत प्रतिशत गारंटी भी है । ।इबादत के लिए कुरान -ए-पाक की स्टडी जरूरी है । कलाम पाक की शिक्षा से बेहतर कोई शिक्षा नही ।