📅 Published on: March 7, 2024
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर नगर सहित ग्रामीण इलाकों में बिना लाइसेंस मेडिकल स्टोर पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की भरमार हो गई है। सब कुछ जानते हुए भी विभागीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
यही नहीं इन जांचों के लिए झोलाछाप चिकित्सक भी मरीज को मसवरा देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जा रहे अधिकतर मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट नहीं है। मेडिकल संचालित करने वालों की अगर शैक्षिक योग्यता की जांच कर दी जाए तो भगवान ही मालिक है।
क्षेत्रीय लोग बताते हैं कि कभी-कभार औषधि विभाग की ओर से जांच के नाम पर खाना पूर्ति कर लिया जाता है। वहीं अल्ट्रासाउंड व एक्सरे केंद्रों पर शायद ही रेडियोलॉजिस्ट हों।
बताया जाता है कि इन केंद्रों को चलाने की जिम्मेदारी का निर्वहन ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियुक्त आशा कार्यकर्ता ही करते हैं। ग्रामीण इलाकों में अधिकतर आशा कार्यकर्ता बिना किसी चिकित्सक के सलाह के गर्भवती महिलाओं को अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ले जाकर पहुंच जाती हैं।
यह सब को पता है कि अल्ट्रासाउंड के दिये गये रिपोर्ट को एएनएम या आशा कार्यकर्ता पूरी तरह से समझ नहीं पाएंगे, बावजूद केवल कमीशन लेने के चक्कर में इस तरह का कृत किया जा रहा है।
यही नहीं यह गर्भवती महिला की जांच के नाम पर 9 माह में कई बार तक अल्ट्रासाउंड करा दिया जा रहा है जो पेट में पल रहे शिशु के लिए काफी नुकसानदेह साबित होता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बर्डपुर, बजहां, अलीगढ़वा, धनगढ़वा, खुनुवा, ककरहवा, मोहाना, चेतिया , कठेला, सिकरी में अवैध अल्ट्रासाउंड,मेडिकल व पैथोलाजी बिना किसी भय के संचलित हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सुविधा शुल्क के चक्कर में आमजन के नफा नुकसान को पूरी तरह से ताक पर रख दिए हैं। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।
लोगों ने अवैध तरीके से संचालित इन केन्द्रों को जांच कर बंद कराने की मांग की है। वहीं अवैध मेडिकल संचालन के सम्बन्ध में ड्रग इंस्पेक्टर डा0 नवीन से संपर्क नहीं हो सका।
इस सम्बन्ध में सीएमओ डा0 डी0के0 चौधरी ने कहा अवैध अल्ट्रासाउंड की जानकारी नहीं है, अवैध अल्ट्रासाउंड पर छापेमारी की जाती है, अभियान चलाकर छापेमारी कर कार्रवाई की जायेगी।