मणिपुर : हिंसाके एक साल बाद भी नहीं थम रहा संघर्ष , सड़कों पर हथियारबंद लोग , पूरा राज्य दो हिस्सों में बंटा

हम अपने ही एक कुटुंब को नहीं बचा पा रहे हैं और वसुधैव कुटुम्बकम की बात करते हैं लंका भेदने वाले अपने ही नागरिकों को राम भरोशे छोड़ रखा है | राज्य में सामान्य हालात दूर की बात, 250 राहत शिविरों में 58 हजार से ज्यादा लोगों का संघर्ष जारी

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इंफाल । मणिपुर में जारी जातीय हिंसा को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन हिंसा के एक साल बाद भी राज्य में मैतेई और कुकी-ज़ोमी जनजाति के बीच तनाव जारी है।

पिछले साल 3 मई को शुरू हुई इस जातीय हिंसा में अब तक 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके है। 58 हजार से अधिक बेघर लोग राहत शिविरों में तकलीफों में रह रहें है।

राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब है कि जेड सुरक्षा के साथ भी राज्य के मुख्यमंत्री पिछले एक साल में कुकी-जोमी इलाकों में जानमाल के नुकसान का जायजा लेने नहीं जा पाए है।

यहां समाज बिखर चुके हैं। दफ्तर हों या अस्पताल, कहीं भी सरकारी सिस्टम नहीं बचा है। सरकार के सर्कुलर के बावजूद सरकारी दफ्तरों से कर्मचारी गायब हैं।

कुकी बहुल जिले हों या मैतेई बहुल, सड़कों पर हथियारबंद लोग नजर आ जाएंगे। पूरा राज्य दो हिस्सों में बंटा है। हालात यह है कि कुकी-जोमी जनजाति के लोग अब इंफाल घाटी में आने का कोई जोखिम नहीं उठाते, जबकि पहाड़ों में बसे मैतेई लोगों ने अपने घर-जमीन सबकुछ छोड़ दिया है।