सिद्धार्थ नगर – भारी बारिश से नदियों में उफान, बाणगंगा नदी के कटान से महथा और लेदवा गांव के ग्रामीण खौफ में

शनिवार को हुई भारी बारिश ने राप्ती नदी , बाणगंगा नदी सहित कई नालों का जलस्तर बढ़ गया है गौरा क्षेत्र के परैय्या नाले पर पानी चढ़ जाने से आवागमन को प्रशासन ने रोक दिया

nizam ansari 

सिद्धार्थ नगर में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। बारिश के चलते नदियों में उफान आ गया है, और बाणगंगा नदी में जल स्तर बढ़ने से आसपास के गांवों में खतरा मंडराने लगा है। विशेष रूप से महथा और लेदवा गांव के बीच कटान की स्थिति ने ग्रामीणों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

बाणगंगा नदी का जल स्तर तेजी से बढ़ने के कारण नदी के किनारे बसे इन गांवों में कटान तेज हो गया है। कटान के चलते कई स्थानों पर भूमि का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया है, जिससे वहां के निवासी अपने घरों और खेतों को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई ग्रामीणों ने अपने घरों को खाली करना शुरू कर दिया है और सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही कटान को रोका नहीं गया तो उनके घरों और खेतों को भारी नुकसान हो सकता है। इस खतरे के बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

शोहरतगढ़ विधायक विनय वर्मा की सूचना पर एस डी एम चंद्रभान सिंह ने कटान स्थल का जायजा लिया स्थानीय प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और संभावित आपदा को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत राहत कार्य शुरू करने की मांग की है ताकि उनके जीवन और संपत्ति को सुरक्षित किया जा सके।

महथा और लेदवा गांव के निवासी इस समय खौफ में हैं, क्योंकि बाणगंगा नदी के कटान की वजह से उनका जीवन और आजीविका दोनों ही खतरे में हैं। बारिश का कहर जारी रहा तो स्थिति और भी विकराल हो सकती है, और इसके लिए तत्काल राहत और बचाव कार्यों की आवश्यकता है।

महथा गांव के ग्राम प्रधान आसिम नैय्यर ने बाणगंगा नदी के कटान से उत्पन्न स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा, “यह एक बेहद गंभीर स्थिति है, और हम सभी ग्रामीण बहुत डरे हुए हैं। हर साल बाढ़ का खतरा हमारे सिर पर मंडराता है, लेकिन इस बार कटान की वजह से हालात और भी बदतर हो सकते हैं। नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, और इसके साथ ही हमारी जमीन भी नदी में समाती जा रही है।”

आसिम नैय्यर ने प्रशासन से तत्काल सहायता की मांग करते हुए कहा, “हमारे गांव के लोग अपने घरों और खेतों को बचाने के लिए दिन-रात संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बिना प्रशासनिक मदद के यह संभव नहीं है। मैंने कई बार जिला अधिकारियों से संपर्क किया है, जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाने की बात कही गयी है। अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई, तो हमारे गांव का बड़ा हिस्सा नदी में समा जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारी प्राथमिकता इस समय गांव के लोगों की सुरक्षा है। मैंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहें। लेकिन यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे हमें इस संकट से बाहर निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।”

आसिम नैय्यर ने अंत में कहा, “मैं प्रशासन से आग्रह करता हूं कि वे जल्द से जल्द कटान को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करें और ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करें। हमारे गांव के लोग बेहद चिंतित और खौफ में हैं, और उन्हें इस समय सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है।”