सिद्धार्थ नगर – अपनी ही जमीन पाने में लग गए 40 साल , महिला ने डी एम डॉ राजगणपति आर का जताया आभार

1985 से चले आ रहे जमीनी विवाद को तहसीलदार कोर्ट में इतना लम्बा अरसा लग गया यदि डी एम सिद्धार्थ नगर मामले में जल्आद सुनवाई देश नहीं देते तो घिसी पिटी थकाउ प्रक्रिया में न्याय मिलते मिलते स्वर्ग सिधार जाती | वाकई में डी एम को उनके अछे कामों के लिए याद किया जायेगा |

अशरफ अन्सारी

सिद्धार्थनगर- अफसरों की शिथिलता कहे या कानूनी दिक्कत, अमूमन कोई भी व्यक्ति मुकदमा लड़ने में ही उम्र का बड़ा हिस्सा खपा देता है पर उसे समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में यदि न्याय देने वाले अफसर की निगाह पड़े तो निश्चय ही पीड़ित व्यक्ति को न्याय एक झटके में भी मिल जाता है। ऐसा ही एक मामला नौगढ़ तहसील के अंतर्गत पटखौली गांव का सामने आया है, जहां एक महिला को 39 वर्ष तक चले मुकदमा में निर्णय उसके पक्ष में मिल सका। यह सब डीएम डॉ. राजा गणपति आर के रूचि से संभव हुआ।

नौगढ़ तहसील के पटखौली गांव निवासी सरवती का भूमि से संबंधित एक मुकदमा तहसीलदार नौगढ़ के राजस्व न्यायालय में 1985 से ही चल रहा था। इस मामले में महिला को तारीख पर तारीख मिल रही थी।

वह न्याय पाने से वर्षों दूर थी। महिला ने एक पखवारा पूर्व डीएम के समक्ष प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई। डीएम ने तहसीलदार संतराज सिंह को गुणदोष के आधार पर जल्द सुनवाई कर न्याय दिलाने के लिए निर्देशित किया।

तहसीलदार ने मुकदमे को 15 दिवस के अंदर निस्तारित कर दिया। दरअसल सरवती के पिता अधारे के नाम दो बीघा खेती की जमीन थी। उनकी मौत 1985 में हो गई। परिवार के कुछ लोगों ने जमीन अपने नाम करवा लिया जबकि वारिस के रूप में अधारे की पुत्री सरवती थी। तहसीलदार के न्यायालय में मुकदमा चल रहा था।

रविवार को तहसीलदार ने पटखौली पहुंचकर लेखपाल, राजस्व निरीक्षक के साथ कोर्ट (मुआयना) लगा कर ग्राम वासियों के बयान लेकर 39 साल पुराने मामले को गुण दोष के आधार पर निस्तारित कर दिया। तहसीलदार संतराज सिंह ने बताया कि मुकदमे को 15 दिन में गुण दोष के आधार पर निस्तारित कर दिया गया है।