📅 Published on: January 15, 2025
गुरु जी की कलम से
मकर संक्रांति पूरे भारत और नेपाल में भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन वैकल्पिक अवकाश वे गैर-कार्य दिवस होते हैं जो कुछ देश किसी विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक, जनसांख्यिकीय या रोजगार समूह के नागरिकों को किसी विशेष दिन को मनाने या स्मरण करने के लिए प्रदान करते हैं।
रक्षाबंधन या राखी भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक वैकल्पिक अवकाश है। ,: इस पर्व को मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है।
वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।
14 जनवरी के बाद से सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर होता है। इसी कारण इस पर्व को ‘उतरायण’ भी कहते है।
मकर संक्रांति का पर्व भारतवर्ष तथा नेपाल के सभी प्रांतो में अलग-अलग नाम व भांति-भांति के रीति-रिवाजों द्वारा भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया जाता है।
उत्तर प्रदेश , छत्तीसगढ़, गोआ, ओड़ीसा, हरियाणा, बिहार, झारखण्ड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, सिक्किम, उत्तराखण्ड, पश्चिमबंगाल, गुजरात और जम्मू में इसे मकर संक्रांति नामक उत्सव के रूप में जाना जाता हैं
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तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल और चौथे व अन्तिम दिन कन्या-पोंगल।
जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्रप्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहते हैं। गुजरात और उत्तराखण्ड में इसे उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है l
उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग इसे खिचड़ी पर्व के रूप मे धूमधाम से मानते हैं l उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से ‘दान का पर्व’ है। प्रयागराज में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है।
14 जनवरी से ही प्रयागराज में हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है। बिहार के कुछ जिलों में यह पर्व ‘तिला संक्रांत’ नाम से भी प्रसिद्ध है। जम्मू में यह पर्व “उत्तरैन” और “माघी संगरांद” के नाम से विख्यात है कुछ लोग इसे उत्रैण, अत्रैण’ अथवा ‘अत्रणी’ के नाम से भी जानते है।
असम में मकर संक्रान्ति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं। बंगाल में इस पर्व पर स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। यहाँ गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है।
भारत के बाहर भी विभिन्न देशों मे यह पर्व विभिन्न नामों से मनाया जाता है l
नेपाल में मकर संक्रांति को माघे-संक्रांति, सूर्योत्तरायण और थारू समुदाय में ‘माघी’ कहा जाता है
। श्रीलंका मे मकर संक्रांति को पोंगल, या उझवर तिरुनल कहा जाता है। बांग्लादेश मे इसे पौष संक्रान्ति, थाईलैण्ड मे सोंगकरन, कम्बोडिया मे मोहा संगक्रान, म्यांमार मे थिंयान आदि नामों से यह पर्व मनाया जाता है l
मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूँकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।
मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई गंगासागर से सागर में जाकर मिली थीं। कुछ जगहों पर कुछ प्रान्तों में तो मकर संक्रांति के दिन सार्वजनिक अवकाश होता है केंद्र सरकार इस दिन वैकल्पिक अवकाशकी घोषणा करती है जानकारों ने वैकल्पपी का अवकाश केबारे में बताया है कि वैकल्पिक अवकाश वे गैर-कार्य दिवस होते हैं जो कुछ देश किसी विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक, जनसांख्यिकीय या रोजगार समूह के नागरिकों को किसी विशेष दिन को मनाने या स्मरण करने के लिए प्रदान करते हैं।
रक्षाबंधन या राखी भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक वैकल्पिक अवकाश है।